Yogini Ekadashi 2026: कब किया जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? जानें व्रत की सही तारीख, पूजा का समय और किन बातों का रखें ध्यान

Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी का व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस तिथि पर भक्त उपवास करते हैं और सच्चे मन से श्री हरि की उपासना करते हैं। आइए जानें यह व्रत कब किया जाएगा और इसमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

अपडेटेड Jul 02, 2026 पर 7:00 AM
उदया तिथि के अनुसार, शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को योगिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा।

Yogini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इसी दिन भक्त एकादशी व्रत करते हैं। इस व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल माध्यम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे विधि-विधान से पूरे साल में आने वाली सभी 24 एकादशी तिथियों को व्रत करने वाले भक्तों के सभी दुख भगवान विष्णु दूर करते हैं। इन्हीं एकादशी व्रत में से एक है योगिनी एकादशी, जिसका व्रत आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। आइए जानें इसकी सही तारीख और मुहूर्त

योगिनी एकादशी 2026 तारीख

एकादशी तिथि प्रारंभ : 10 जुलाई 2026 को सुबह 08:16 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 11 जुलाई 2026 को सुबह 05:22 बजे तक

उदया तिथि के अनुसार व्रत की तारीख : शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

पारणा की तारीख और समय : 11 जुलाई 2026 को दोपहर 01:50 बजे से शाम 04:36 बजे के बीच


ध्यान रखें कि सुबह 10:32 बजे तक हरि वासर समाप्त होने के बाद ही एकादशी व्रत का पारण करना सबसे उत्तम माना जाता है।

व्रत के दौरान इन बातों का विशेष रखें ध्यान

योगिनी एकादशी का व्रत करने वाले और सामान्य रूप से भगवान विष्णु के भक्तों को इस दिन कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए :

  • एकादशी के दिन घर में किसी भी सदस्य को चावल नहीं खाना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चावल खाना अखाद्य माना गया है।
  • दशमी तिथि की रात से लेकर द्वादशी तक भोजन में प्याज, लहसुन, मांसाहार, शराब या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का प्रयोग न करें।
  • एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना पूरी तरह वर्जित होता है। यदि पूजा के लिए तुलसी दल की आवश्यकता है, तो उसे एक दिन पहले (दशमी) को ही तोड़कर रख लें।
  • यदि आप पूर्ण या फलाहार व्रत रख रहे हैं, तो साधारण नमक के बजाय सेंधा नमक का इस्तेमाल करें। व्रत में गेहूं, जौ, दालें और अन्य अनाज पूरी तरह छोड़ दिए जाते हैं।
  • इस दिन किसी की निंदा न करें, झूठ न बोलें और क्रोध या विवाद से बचें। ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन को शांत रखें।
  • एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए। रात के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने दीपक जलाकर भजन-कीर्तन या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।

पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या पीले वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • भगवान को पीले फूल, पीले वस्त्र, चंदन, धूप-दीप और फल अर्पित करें।
  • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें और योगिनी एकादशी की व्रत कथा जरूर सुनें या पढ़ें।
  • अगले दिन द्वादशी को शुभ मुहूर्त में जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को भोजन/दान देकर अपने व्रत का पारणा करें।

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