Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का होना अनिवार्य माना जाता है। यही वजह है कि भगवान विष्णु का भोग तुलसी दल के बिना अपूर्ण माना जाता है। तुलसी को विष्णुप्रिया भी कहते है। आज आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है। आज से भगवान विष्णु पाताल लोक में चार माह के लिए शयन करेंगे और चतुर्मास की शुरुआत होगी।
यह समय धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के शयन काल शुरू होने से पहले तुलसी माता की पूजा करने और उनके समीप दीपक जलाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इससे घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक खुशहाली बनी रहती है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक का समय चतुर्मास कहलाता है।
चतुर्मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। सनातन परंपरा में तुलसी जी को विष्णुप्रिया माना गया है, यानी वे भगवान श्रीहरि को अत्यंत प्रिय हैं। इसी वजह से देवशयनी एकादशी पर तुलसी पूजन का विशेष महत्व होता है। इसके पीछे के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक कारण निम्नलिखित हैं :
ऐसे करें देवशयनी एकादशी पर तुलसी पूजन
देवशयनी एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और तुलसी के पौधे के आसपास की जगह को साफ करें। तुलसी माता को जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। पूजन के दौरान तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा शांति की कामना करें। शाम के समय पुनः तुलसी के पास दीपदान करना भी शुभ माना गया है।