Devshayani Ekadashi 2026: 3 बड़े योगों में किया जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, जानें सही तारीख, मुहूर्त और पारण का समय

Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी व्रत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल देवशयनी एकादशी पर 3 अत्यंत शुभ योगों का निर्माण होने से यह दिन बहुत खास हो गया है। आइए जानें एकादशी व्रत किस दिन किया जाएगा, शुभ मुहूर्त और पारण का समय क्या होगा

अपडेटेड Jul 18, 2026 पर 7:00 AM
देवशयनी एकादशी का व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है।

Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा में चले जाते हैं और चतुर्मास प्रारंभ हो जाता है। श्री हरि सावन, भादों, आश्विन और कार्तिक माह में शयन करते हैं। इस अवधि में सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। इस अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और जनेऊ आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

देवशयनी एकादशी का व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। यह एकादशी पूरे साल में आने वाले सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण एकादशी में से एक मानी जाती है। इस साल देवशयनी एकादशी व्रत में एक साथ 3 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। साथ ही उनके निमित्त एकादशी का व्रत रखा जाता है।

कब मनाई जाती है देवशयनी एकादशी?

हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जुलाई को सुबह 09 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, एकादशी तिथि 25 जुलाई को दिन में 11 बजकर 34 मिनट तक है। उदया तिथि के अनुसार, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन से चातुर्मास शुरू होगा।

देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक रहता है चतुर्मास

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं। वहीं, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु जागृत होते हैं। इस दिन देवउठनी एकादशी मनाई जाती है।


देवशयनी एकादशी पारण समय

देवशयनी एकादशी का पारण 26 जुलाई के दिन किया जाएगा। 26 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 22 मिनट के मध्य साधक स्नान-ध्यान कर विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण की पूजा करें। इसके बाद अन्न का दान कर एकादशी का पारण करें।

देवशयनी एकादशी शुभ योग

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर ब्रह्म और इंद्र योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। वहीं, देवशयनी एकादशी पर शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक को मनचाहा वरदान मिलेगा।

Ravi Pradosh Vrat 2026 Date: आषाढ़ का अंतिम प्रदोष व्रत भी होगा रविवार को, इस दिन बन रहा सर्वार्थ सिद्धि और इंद्र योग का दुर्लभ संयोग

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।