Gauri Vrat 2026 Date: आषाढ़ माह में कब किया जाएगा गौरी व्रत, जानें तारीख, मुहूर्त और समापन की तिथि

Gauri Vrat 2026 Date: गौरी व्रत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से शुरू होकर पूर्णिमा तिथि तक चलता है। कुंवारी कन्याएं और विवाहित महिलाएं इस दिन माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। यह व्रत सुखी दांपत्य और अखंड सौभाग्य की कामना से किया जाता है। आइए जानें इसकी तारीख

अपडेटेड Jul 18, 2026 पर 7:04 PM
जया पार्वती व्रत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू हो कर आषाढ़ पूर्णिमा तक किया जाता है।

Gauri Vrat 2026 Date: आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि सिर्फ देवशयनी एकादशी व्रत के लिए ही नहीं जानी जाती है। इसी दिन से 5 दिनों तक चलने वाला महिलाओं का एक कठिन व्रत भी शुरू होता है। इस व्रत को गौरी व्रत, जया पार्वती व्रत या मोरकत व्रत के नाम से भी जाना जाता है। ये व्रत सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं दोनों के लिए बड़ा खास होता है। यह कठिन व्रत भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इस व्रत के दिन विधि-विधान से माता पार्वती का पूजन किया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि जया पार्वती का व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने पर सुहागिन महिलाओं को पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य का वरदान प्राप्त होता है। यह व्रत रखने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, जया पार्वती व्रत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू हो कर आषाढ़ पूर्णिमा तक किया जाता है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत भी किया जाता है।

गौरी व्रत 2026 की महत्वपूर्ण तारीखें

व्रत का प्रारंभ (पहला दिन): 25 जुलाई 2026, शनिवार

व्रत का समापन (अंतिम दिन): 29 जुलाई 2026 (बुधवार)

पूजा के शुभ मुहूर्त


25 जुलाई 2026: पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं :

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:16 बजे से 04:57 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक

सुबह का शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 07:21 बजे से 09:03 बजे तक

प्रदोष काल (लाभ-उन्नति मुहूर्त): शाम 07:17 बजे से रात 08:34 बजे तक

गौरी व्रत का महत्व

योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंवारी कन्याएं इस व्रत को नियम और श्रद्धा से रखकर माता गौरी और भगवान शिव से मनचाहा और योग्य वर पाने का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

सुखी वैवाहिक जीवन : विवाहित महिलाएं अपने दांपत्य जीवन में सुख, शांति, आपसी प्रेम और समृद्धि बनाए रखने के लिए यह व्रत करती हैं।

पूजा विधि की विशेषता : इस पांच दिवसीय व्रत के दौरान महिलाएं पवित्र मिट्टी से माता गौरी, भगवान शिव और गणेश जी की प्रतिमा बनाती हैं, जवारे (अंकुर) बोती हैं और पांच दिनों तक सुबह-शाम नियमपूर्वक आरती और पूजा-अर्चना करती हैं।

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