Gayatri Jayanti 2026 Date: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गायत्री माता की उत्पत्ति ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को हुई थी। इसलिए गायत्री जयंती का पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन निर्जला एकादशी का भी व्रत किया जाता है। गायत्री माता से ही 4 वेदों की उत्पत्ति हुई है। यही वजह है कि इन्हें वेदों की माता कहा जाता है। इनके शक्तिशाली मंत्र में चारों वेदों का सार है। माना जाता है कि गायत्री माता की पूजा स्वयं त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी करते हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल गायत्री जयंती का पर्व 25 जून 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन तीन शुभ योग बन रहे हैं, लेकिन भद्र का भी प्रभाव रहेगा।
वैदिक पंचांग के अनुसार, 24 जून बुधवार को शाम 6:12 बजे से ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरूआत हो रही है। यह तिथि 25 जूर गुरुवार को रात 8:09 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, गायत्री जयंती 25 जून गुरुवार को है।
3 शुभ योग में गायत्री जयंती 2026
इस साल की गायत्री जयंती पर रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग बनेंगे। उस दिन स्वाति नक्षत्र है। गायत्री जयंती पर शिव योग प्रात:काल से लेकर सुबह 10 बजकर 54 मिनट तक है, उसके बाद से सिद्ध योग है। ये दोनों ही योग जप, तप, साधना के लिए श्रेष्ठ हैं। गायत्री जयंती पर रवि योग सुबह 05 बजकर 25 मिनट पर बनेगा और इसका समापन शाम को 04 बजकर 29 मिनट पर होगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, इससे इस योग में सभी दोष मिट जाते हैं। गायत्री जयंती पर गुरुवार का दिन और एकादशी तिथि भगवान विष्णु से संबंधित हैं, हरि कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गायत्री जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त 04:05 ए एम से लेकर 04:45 ए एम तक है. इस समय में स्नान करें। फिर सूर्योदय 05:25 ए एम पर सूर्य देव को अर्घ्य दें। शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 05:25 ए एम से लेकर सुबह 07:10 ए एम तक है। इस मुहूर्त में गायत्री मंत्र का जाप करें। गायत्री जयंती पर अभिजीत मुहूर्त 11:56 ए एम से दोपहर 12:52 पी एम तक है।
गायत्री जयंती पर भद्रा काल
गायत्री जयंती के दिन भद्रा सुबह 07:08 ए एम से लगेगी और इसका समापन रात में 08:09 पी एम पर होगा। इस भद्रा का वास पाताल लोक में होगा। इससे धरती पर पूजा, जप-तप पर कोई असर नहीं होगा।
ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्