Guru Pushya Nakshatra 2026: देवगुरु बृहस्पति ने कुछ समय पहले अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश किया है। गुरु का कर्क राशि में गोचर 12 साल बाद हुआ है। इस राशि में रहते हुए अब वो शनि के स्वामित्व वाले नक्षत्र पुष्य में प्रवेश करेंगे। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना जाता है। गुरु और पुष्य के मिलन से गुरु पुष्य योग बनता है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत फलदायी और प्रभावशाली माना जाता है।
गुरु अपनी सबसे प्रभावशाली कर्क राशि में रहते हुए 18 जून को पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और से 18 अगस्त तक इसी में रहेंगे। पुष्य को 'नक्षत्रों का राजा' कहा जाता है, जिसके देवता खुद गुरु हैं और स्वामी शनि देव। गुरु इस समय उच्च के हैं, इसलिए उनका यह गोचर शुभ प्रभाव वाला माना जा रहा है। गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन धन, सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत का वरदान पाने का सबसे सुनहरा मौका है। अगर आप भी इस महागोचर का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं और अपने जीवन से पैसों की तंगी व बीमारियों को दूर भगाना चाहते हैं, तो इस दौरान ये 5 अचूक उपाय जरूर करें।
गुरु को मजबूत करेगा केसर या हल्दी का तिलक : गुरु ग्रह का संबंध पीले रंग और खुशहाली से है। इस गोचर के दौरान अपने माथे और नाभि पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं। इससे कुंडली में गुरु मजबूत होंगे, आपका मान-सम्मान बढ़ेगा और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहेगी।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ : आपका पैसा कहीं फंसा हुआ है या कर्ज बढ़ रहा है, तो इस गोचर के दौरान रोज या हर गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या उसे सुनें। इससे धन आगमन के नए रास्ते खुलेंगे। पुष्य नक्षत्र के देवता खुद बृहस्पति हैं और भगवान विष्णु इसके प्रधान देव हैं।
बरकत और सुख-समृद्धि के लिए : गुरु पुष्य योग में पीले रंग की चीजों चने की दाल, केला, पीले वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें या हल्दी का गुप्त दान करें। पीली वस्तुओं का दान घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होने देता।
गाय को गुड़-चना खिलाएं : लंबे समय से सेहत से जुड़ी समस्याओं से परेशान हैं, तो इस गोचर काल में नियमित रूप से गुरुवार को गीली चने की दाल और गुड़ अपने हाथों से गाय को खिलाएं। गाय की पीठ पर हाथ फेरकर उनका आशीर्वाद लें। इस उपाय से शारीरिक बीमारियां दूर होती हैं और सेहत का वरदान मिलता है।
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