Hariyali Teej 2026: 14 या 15 अगस्त, इस साल कब है हरियाली तीज? पंडित जी से जानें इस व्रत के नियम और महत्व

Hariyali Teej 2026: सावन के महीने में महिलाओं का बेहद अहम हरियाली तीज का व्रत किया जाता है। यह व्रत मां पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए की गई घोर तपस्या का प्रतीक है। आइए जानें इस साल यह व्रत किस दिन किया जाएगा और इसके नियम और महत्व क्या हैं

अपडेटेड Jul 30, 2026 पर 9:05 PM
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हरियाली तीज का व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है।

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज का व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य की कामना से किया जाने वाला यह महिलाओं का प्रमुख व्रत है। इस व्रत को अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर का आशीर्वाद पाने के लिए भी करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौराणिक काल में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर पाव्रती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। माता पार्वती की इसी घोर तपस्या के प्रतीक के रूप में हरियाली तीज का व्रत किया जाता है।

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनचाहे जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने न्यूज 18 को बताया, वर्ष 2026 में हरियाली तीज के दिन कई शुभ योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन शनिवार, सिद्ध योग और शिव योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। शुभ योगों में पूजा-अर्चना करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

हरियाली तीज 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 6:47 बजे से प्रारंभ होगी और 15 अगस्त 2026 को शाम 5:29 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत और पूजन 15 अगस्त, शनिवार को किया जाएगा।

पूजा विधि

हरियाली तीज के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ और विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें गंगाजल, अक्षत, रोली, चंदन, पुष्प, बेलपत्र, धतूरा, फल और मिठाई अर्पित करें। पूजन के दौरान शिव-पार्वती की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। शिव मंत्र और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें। परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।


हरियाली तीज व्रत के नियम

  • इस व्रत में सुहाग सामग्री का दान भी शुभ माना जाता है।
  • हरियाली तीज पर क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
  • व्रत के दौरान सात्विक भोजन और पूजा-पाठ पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

हरियाली तीज का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था, इसलिए यह पर्व अटूट प्रेम, समर्पण और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व का सीधा संबंध प्रकृति से है। सावन का महीना चारों ओर हरियाली लेकर आता है। यह पर्व प्रकृति, प्रेम, सौभाग्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देता है।

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