Hariyali Teej 2026 Vastu tips: हरियाली तीज हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए मनाया जाता है। कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 108 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। तब भगवान शिव ने सावन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। यह पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
कब किया जाएगा हरियाली तीज 2026 व्रत?
हरियाली तीज 2026 का व्रत 15 अगस्त 2026, शनिवार को रखा जाएगा।
तृतीया तिथि प्रारंभ : 14 अगस्त 2026 को शाम 6:46 बजे से
उदया तिथि : 15 अगस्त 2026 को पड़ने के कारण व्रत इसी दिन रखा जाएगा।
शिव-पार्वती की मूर्ति रखने के लिए कौन सी दिशा है शुभ?
वास्तु शास्त्र में पूजा-पाठ, देवी-देवताओं के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हरियाली तीज के दिन शिव-पार्वती की मूर्ति को उत्तर-पूर्व दिशा में विराजमान करना चाहिए। यह दिशा को देवताओं की मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को विराजमान करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए कहा जाता है कि मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्ति को विराजमान करने से पहले शुभ दिशा के बारे में जरूर जान लें।
अगर घर में उत्तर-पूर्व दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को रखना संभव नहीं है, तो ऐसे में उत्तर दिशा में मूर्ति को विरजमान करना शुभ माना जाता है। इस दिशा में मूर्ति को विराजमान करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। हरियाली तीज के दिन पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख होना चाहिए।
किस दिशा में न रखें मूर्ति?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति को दक्षिण दिशा में भूलकर भी विराजमान नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस दिशा में पितरों का वास माना जाता है। इस दिशा में पूजा करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होता है।