Jyeshtha Amavasya 2026: आज ज्येष्ठ अमावस्या, वट सावित्री व्रत, शनि जयंति, शनिश्चरी अमावस्या, 300 साल बाद बन रहा 5 शुभ योगों का महासंयोग

Jyeshtha Amavasya 2026: आज ज्येष्ठ माह की अमावस्या है। आज के दिन देश के कई हिस्सों में वट सावित्री व्रत भी किया जाता है। आज ही के दिन शनि जयंति भी मनाई जाती है। इस साल यह दिन 5 बेहद शुभ योगों का महासंयोग लेकर आया है, जो 300 साल बाद बन रहा है। आइए जानें

अपडेटेड May 16, 2026 पर 7:00 AM
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पंचांग के अनुसार, आज ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि है।

Jyeshtha Amavasya 2026: पंचांग के अनुसार, आज ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि है। आज के दिन शनिदेव का जन्म हुआ था, इसलिए आज शनि जयंति मनाई जाती है। इसके साथ ही आज अमावस्या तिथि का दान-पुण्य भी किया जाता है, क्योंकि हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस तिथि का महत्व बस इतना ही नहीं है। इसी दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री का व्रत भी करती हैं। इस साल यह पर्व आज यानी शनिवार, 16 मई, 2026 को मनाया जा रहा है। इस साल यह दिन अपने साथ कई बड़े और दुर्लभ संयोग लेकर आया है। इस साल ज्येष्ठ अमावस्या पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का संयोग लगभग 300 साल बाद बन रहा है। आइए जानें आज के दिन के पर्व और शुभ योगों के बारे में

वट सावित्री व्रत : इसे हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं का एक प्रमुख व्रत माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। महिलाएं इस दिन वट (बरगद) के पेड़ की पूजा करती हैं और व्रत रखती हैं।

शनि जयंति : शनि जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन शनि देव का जन्म हुआ था। शनि जयंती पर शनि दोष, साढ़े साती आदि से बचाव के लिए शनि शांति पूजा और तेलाभिषेक किया जाता है।

ज्येष्ठ अमावस्या : हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि पितरों की शांति, स्नान-दान और पूजा-पाठ के लिए समर्पित है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि इससे पितृ दोष कम होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या आज : शनिवार के दिन अमावस्या होने से इसे 'शनिश्चरी अमावस्या' कहते हैं। यह दिन शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के लिए यह 300 साल का सबसे अच्छा दिन माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस बार शनि जयंति शनिवार के दिन है और स्वयं शनि देव स्वराशि में विराजमान हैं।

300 साल बाद 5 योगों का महा संयोग


ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जन्मोत्सव और वट सावित्री व्रत पर 300 साल बाद शश महापुरुष योग, गजकेसरी योग, बुद्धादित्य योग, सौभाग्य योग और शोभन योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। इन योग में पूजा करने से सभी अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

ज्येष्ठ अमावस्या तिथि और मुहूर्त

अमावस्या तिथि प्रारंभ : 16 मई, सुबह 05:11 बजे से

अमावस्या तिथि समाप्त : 17 मई, रात 01:30 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4 बजकर 7 मिनट से 4 बजकर 48 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक

विजय मुहूर्त : दोपहर 2 बजकर 34 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक

अमृत काल : दोपहर 1 बजकर 15 मिनट से 2 बजकर 40 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 7 बजकर 4 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक

ज्येष्ठ अमावस्या पर अशुभ समय

राहुकाल : सुबह 8 बजकर 54 मिनट से 10 बजकर 36 मिनट तक

यमगंड : दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 42 मिनट तक

गुलिक काल : सुबह 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक

दुर्मुहूर्त : सुबह 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 24 मिनट और 6 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 19 मिनट तक

16 मई को पूरे दिन आडल योग रहेगा

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