Krishna Janmashtami 2026: आज भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव पूरी दुनिया में आधी रात के समय शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ी कथाओं के अनुसार, देवकी मथुरा के राजा कंस की बहन थीं, जिनसे उन्हें बहुत लगाव था। वासुदेव संग देवकी के विवाह के बाद कंस स्वयं रथ में बिठाकर उन्हें ससुराले लेकर जा रहे थे। तभी हुई आकाशवाणी ने कहा कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा।
इसके बाद राजा कंस ने अपनी बहन और बहनोई को कारागार में डाल दिया और उनके सात पुत्रों का वध कर दिया था। जब देवकी ने आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण को जन्म दिया उस समय आधी रात का समय था। मथुरा कारागार के सभी द्वार अपने-आप खुल गए और सभी बंदी गहरी नींद में सो गए। इस समय भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी, चंद्रमा वृषभ राशि में और रोहिणी नक्षत्र लगा था। यह ऐसा संयोग है, जो कई वर्षों में एक बार बनता है। इसलिए हर साल भाद्रवपद कृष्ण अष्टमी तिथि के साथ मध्यरात्रि और रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। लेकिन कृष्ण की पूजा आधी रात को क्यों करें? इसका जवाब उनके जन्म की आम कहानी बताने से कहीं ज्यादा है।
आधी रात में भगवान स्वयं उम्मीद की किरण बन आए
हिंदू परंपरा के अनुसार, कृष्ण का जन्म देवकी और वासुदेव के घर जेल में हुआ था, जहां राजा कंस ने उन्हें कैद कर रखा था। इस समय में बहुत सारे संकेत हैं। आधी रात के समय अंधेर सबसे घना होता है। इस समय कृष्ण का आना सबसे उदास समय में उम्मीद की किरण का आना है। यह एक स्पष्ट आध्यात्मिक संदेश है। अंधेरे का मतलब यह नहीं है कि कुछ भी नहीं हो रहा है।
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कृष्ण का जन्म दिखाता है कि हर नियंत्रण एक सीमा तक रह सकता है
कंस अपने राज के लिए हर चुनौती को खत्म करना चाहता था। उसने कृष्ण के माता-पिता को कैद कर लिया और अपने पतन की भविष्यवाणी से बचने की कोशिश की। लेकिन इन कोशिशों के बावजूद, कृष्ण का जन्म हुआ। जन्माष्टमी की कहानी में डर और नियंत्रण के खिलाफ एक गहरी आध्यात्मिक सीख है। असुरक्षित इंसान अपने आसपास सबकुछ नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।
श्रीकृष्ण के जन्म का सबसे अहम हिस्सा कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि है। कृष्ण पक्ष का अर्थ है पूर्णिमा के बाद शुरू होने वाला वह पक्ष, जिसमें चंद्रमा धीरे-धीरे घटता है। इसी पक्ष की आठवीं तिथि को अष्टमी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का जन्म इसी अष्टमी तिथि में हुआ था। इसलिए इस पर्व को जन्माष्टमी कहा जाता है।
श्रीकृष्ण के जन्म पर लगा था रोहिणी नक्षत्र
श्री कृष्ण के जन्म से रोहिणी नक्षत्र का भी विशेष संबंध माना जाता है। भारतीय ज्योतिष और धार्मिक परंपरा में रोहिणी को चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र माना जाता है। साथ ही, यह उनकी पत्नी भी हैं। रोहिणी नक्षत्र पोषण, कलात्मकता, आकर्षण, प्रजनन और तरक्की से जुड़ा है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उस समय अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग था। इसी कारण कई भक्त जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व मानते हैं।