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Falgun month last Pradosh Vrat 2026: रवि प्रदोष होगा फाल्गुन का आखिरी प्रदोष व्रत, जानें व्रत की तारीख, समय और पूजा विधि

Falgun month last Pradosh Vrat 2026: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रविवार के दिन पड़ेगी, इसलिए ये रवि प्रदोष व्रत होगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। आइए जानें फाल्गुन का अखिरी प्रदोष व्रत किस तारीख को होगा, इसका समय और पूजा विधि क्या होगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 18, 2026 पर 8:42 PM
Falgun month last Pradosh Vrat 2026: रवि प्रदोष होगा फाल्गुन का आखिरी प्रदोष व्रत, जानें व्रत की तारीख, समय और पूजा विधि
फाल्गुन महीने के आखिरी प्रदोष व्रत पर शोभन योग सहित कई शुभ संयोग बन रहे हैं।

Falgun month last Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रह का सनातन धर्म में बहुत महत्व है। यह व्रत हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस दिन, भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से मनचाहा फल मिलता है और सुख-समृद्धि बढ़ती है। ज्योतिष गणना के अनुसार, फाल्गुन महीने के आखिरी प्रदोष व्रत पर शोभन योग सहित कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इन योगों के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन भौतिक सुखों की कभी कमी नहीं होगी। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रविवार को पड़ रही है। इसलिए, इस बार साल का पहला रवि प्रदोष किया जाएगा। इस दिन भगवान शिव के साथ सूर्य भगवान की पूजा की जाएगी। इस व्रत में प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की पूजा की जाती है।

फाल्गुन का आखिरी प्रदोष व्रत कब है?

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शनिवार, 28 फरवरी को रात 8:43 बजे शुरू होगी और रविवार, 1 मार्च को शाम 7:09 बजे खत्म होगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि के संयोग को ध्यान में रखते हुए, फाल्गुन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत रविवार, 1 मार्च को रखा जाएगा।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

शिव भक्तों के लिए प्रदोष व्रत बहुत महत्व रखता है। इसमें भक्त कठोर व्रत रखते हैं और प्रदोष काल यानी गोधूलि बेला में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करते हैं। भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा घी का दीया जलाकर फल, फूल, मिठाई और अन्य भोग अर्पित करते हैं। पूरे दिन व्रत करने के बाद अपनी श्रद्धा और क्षमतानुसार शाम को पूजा के बाद या अगले दिन पारण करते हैं।

इस व्रत में शिव लिंग का बेल पत्र, दूध, दही, घी, शहद, और पानी, या पंचामृत से अभिषेक करने से भगवान शिव का आशीर्वाद और कृपा प्राप्त होती है।

प्रदोष व्रत पर जपने के मंत्र

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