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Mesh Sankranti 2026: अप्रैल में सूर्य देव के राशि परिवर्तन पर मनाई जाएगी ये संक्रांति और खत्म होगा खरमास, इन राज्यों में शुरू होगा नया साल

Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति का गहरा धार्मिक और सामाजिक महत्व है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, संक्रांति सूर्य के राशि परिवर्तन पर मनाई जाती है। मेष राशि में सूर्य के प्रवेश से खरमास समाप्त होता है, देश के कुछ राज्यों में नया साल शुरू होता है और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 03, 2026 पर 9:00 PM
Mesh Sankranti 2026: अप्रैल में सूर्य देव के राशि परिवर्तन पर मनाई जाएगी ये संक्रांति और खत्म होगा खरमास, इन राज्यों में शुरू होगा नया साल
सूर्य के राशि परिवर्तन पर संक्रांति मनाई जाती है।

Mesh Sankranti 2026: मेष राशि में सूर्य देव के प्रवेश को मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। दरअसल, ज्योतिष मान्यता के अनुसार सूर्य एक राशि में लगभग 30 दिनों तक रहते हैं। सूर्य के राशि परिवर्तन पर संक्रांति मनाई जाती है। इस तरह एक वर्ष या हिंदू कैलेंडर में 12 संक्रांतियां मनाई जाती हैं।

खत्म होगा खरमास, शुरू होंगे मांगलिक कार्य

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा का कारक माना जाता है। सूर्य जब बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में रहते हैं, तब खरमास लगता है। इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि सूर्य इन राशि में कमजोर अवस्था में रहते हैं। अत: सूर्य जब धनु से मकर राशि में जाते हैं, तो मकर संक्रांति और मीन से मेष राशि में जाते हैं तो मेष संक्रांति मनाते हैं। इसके बाद से शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।

इन राज्यों में मनाया जाएगा नया साल

इसका सामाजित पक्ष ये है कि मेष संक्रांति से नए सूर्य कैलेंडर यानी नए साल की शुरुआत होती है। देश के कई राज्यों में इस दिन नए साल का त्योहार मनाया जाता है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश पर पंजाब में वैसाखी, ओडिशा में पाना संक्रांति और अगले दिन, इसे पश्चिम बंगाल में पोहेला वैशाख, केरल में विशु और तमिलनाडु में पुथंडू के तौर पर मनाया जाता है।

मेष संक्रांति तारीख और मुहूर्त

साल 2026 में मेष संक्रांति सोमवार, 14 अप्रैल को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में होगी। आइए जानें इसका पुण्य और महा पुण्य काल मुहूर्त

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