Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: पानी पीने के ये नियम जानने के बाद ही करें निर्जला एकादशी व्रत करने का फैसला, जानें किन लोगों को है पानी पीने की छूट

Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाएगा। इस व्रत को करने वाले भक्त अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करते हैं। आइए जानें निर्जला एकादशी व्रत में पानी पीने का क्या है नियम और किसे है इससे छूट

अपडेटेड Jun 20, 2026 पर 7:00 AM
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मात्र इस एकादशी का व्रत करने से सभी एकादशी का पुण्य मिल जाता है।

Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी व्रत माना जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। जैसा कि नाम से ही समझ में आ रहा है कि इस व्रत को करने वाले भक्त बिना और जल के उपवास करते हैं। इसलिए यह व्रत पूरे साल आने वाली 24 एकादशियों में सबसे कठिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मात्र इस एकादशी का व्रत करने से सभी एकादशी का पुण्य मिल जाता है। आइए जानें इस व्रत में पानी से जुड़ा यह अहम नियम और किसे होती है निर्जला एकादशी में पानी पीने की छूट?

निर्जला एकादशी में इसलिए नहीं पीते पानी

निर्जला एकादशी व्रत में अन्न, जल, फल, दूध आदि कुछ नहीं लेते हैं। प्रात:काल में व्रत प्रारंभ के समय आचमन करते हैं, व्रत और पूजा का संकल्प करके उपवास प्रारंभ करते हैं तो अगले दिन सूर्योदय तक जल नहीं ग्रहण करते हैं। तभी आपको सालभर के सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य लाभ और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग पी सकते हैं पानी

निर्जला एकादशी के व्रत में बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोगों को छूट है। निर्जला एकादशी व्रत के समय आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई समस्या है तो आप जल ग्रहण कर सकते हैं। आप बिना जल के व्रत नहीं रख सकते हैं तो फलाहार करके व्रत रहें और पूजा करें।

निर्जला एकादशी में इस तरह पीएं पानी


निर्जला एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों के सामने कभी-कभी ऐसी स्थिति आ सकती है, जब बिना पानी के प्राणों पर संकट आ जाए या गला बिलकुल सूख जाए, तो इस स्थिति में क्या करें? पानी कैसे पिएं? इस मामले में धर्म विशेषज्ञों का मानना है कि निर्जला एकादशी के दिन भोर में आप उठकर स्नान आदि कर लें और विधि विधान से श्रीहरि की पूजा करें। सूर्यास्त हो जाए तो उसके 2 घंटे बाद जल पी लें। इससे आपको कम से कम 12 एकादशी व्रत का पुण्य मिल सकता है।

हालांकि कुछ जगहों पर यह बताया गया है कि निर्जला एकादशी के दिन प्राणों की संकट की स्थिति में आप पीतल या चांदी के बर्तन में गंगाजल और स्वच्छ जल भर दें। फिर अपने दोनों हाथों और घुटनों को जमीन पर टिकाकर पशु के समान जल पी सकते हैं। उससे पहले आपको ओम नमो नारायणाय मंत्रका जाप 21 बार करना होगा। इसमें दोष नहीं माना जाएगा। कुछ लोग निर्जला एकादशी को देर रात 12 बजे के बाद थोड़ा सा जल ग्रहण कर लेते हैं।

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