Nirjala Ekadashi 2026:स्वाति नक्षत्र, शिव और सिद्ध योग में किया जाएगा निर्जला एकादशी का व्रत, जानें साल की सबसे कठिन एकादशी की तारीख और मुहूर्त

Nirjala Ekadashi 2026: साल की सभी एकादशी में निर्जला एकादशी का सबसे महत्वपूर्ण और कठिन माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल निर्जला एकादशी पर स्वाति नक्षत्र के साथ-साथ शिव और सिद्ध योग बन रहा है। आइए जानें इसकी तारीख

अपडेटेड Jun 13, 2026 पर 7:19 PM
निर्जला एकादशी पर कई दुर्लभ योग एक साथ बन रहे हैं।

Nirjala Ekadashi 2026: हिंदू धर्म एकादशी तिथि का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। भगवान विष्णु को समर्पित यह तिथि हर हिंदू माह में दो बार कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आती है। पूरे साल में आने वाली सभी एकादशी तिथियों में निर्जला एकादशी का अलग स्थान है। इसे साल सबसे कठिन एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे साल में सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत करने से सभी एकादशी तिथियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था। इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

साल 2026 में निर्जला एकादशी व्रत पर कई दुर्लभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन स्वाति नक्षत्र लग रहा है ओर शिव योग के साथ ही सिद्ध योग भी बन रहा है। इसके अलावा ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन लक्ष्मी नारायण योग का भी संयोग बन रहा है। हालांकि, कुछ भक्तों में इसकी तारीख को लेकर थोड़ा असमंजस है। आइए पंचांग और उदया तिथि के अनुसार इसकी सही तारीख और शुभ मुहूर्त के बारे में जानते हैं।

निर्जला एकादशी 2026 की सही तारीख और मुहूर्त

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है:

एकादशी तिथि शुरू : 24 जून 2026 को शाम 06:12 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे तक


मुख्य तारीख : चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 25 जून को मिल रहा है, इसलिए निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

व्रत पारण का समय

व्रत का विधिपूर्वक पारण अगले दिन 26 जून 2026, शुक्रवार को किया जाएगा। निर्जला एकादशी व्रत का पारण सुबह 05:25 बजे से 08:13 बजे के बीच किया जा सकता है।

निर्जला एकादशी पर बन रहे शुभ संयोग

इस साल निर्जला एकादशी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ योग एक साथ बन रहे हैं :

गुरुवार का दिन : एकादशी और गुरुवार दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित हैं।

शुभ योग : इस दिन स्वाति नक्षत्र के साथ-साथ शिव योग, सिद्ध योग और ज्योतिषीय दृष्टि से लक्ष्मी-नारायण योग का निर्माण हो रहा है। इन संयोगों में की गई पूजा का फल कई गुना फलदायी होता है।

पूजा विधि

संकल्प और स्थापना : सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पूजा सामग्री : भगवान को पीले फूल, तुलसी दल (तुलसी के पत्ते), फल, चने की दाल और गुड़ का भोग लगाएं।

मंत्र जाप : "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार या एक माला जाप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी उत्तम होता है।

दान का महत्व : चूंकि यह साल का सबसे कठिन और बिना पानी का व्रत होता है, इसलिए अगले दिन पारण से पहले किसी जरूरतमंद को जल से भरा कलश (घड़ा), पंखा, तरबूज या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान अवश्य करें।

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