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Phalgun Purnima 2026: होलिका दहन आज और स्नान-दान की पूर्णिमा कल, अपनी राशि अनुसार करें इन चीजों का दान

Phalgun Purnima 2026: होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को किया जाता है। लेकिन इस साल पूर्णिमा तिथि दो दिन रहेगी और इसी दिन चंद्र ग्रहण लगने से पूर्णिमा के धार्मिक अनुष्ठान और होलिका दहन की बेहद महत्वपूर्ण विधि प्रभावित होगी। आइए जानें फाल्गुन पूर्णिमा का स्नान-दान कब किया जाएगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 02, 2026 पर 7:29 PM
Phalgun Purnima 2026: होलिका दहन आज और स्नान-दान की पूर्णिमा कल, अपनी राशि अनुसार करें इन चीजों का दान
इस साल फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग लगभग 100 साल बाद बन रहा है।

Phalgun Purnima 2026 Date: रंगों के पर्व होली से एक शाम पहले फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। जबकि होली चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को खेली जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा को डोल पूर्णिमा, वसंत पूर्णिमा और होली पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित है और इस दिन चंद्रमा की पूजा और उन्हें अर्घ्य अर्पित करने का विधान है। माना जाता है कि इससे चंद्र दोष शांत होता है।

इस साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि दो दिन लग रही है। इसकी शुरुआत आज शाम 6 बजे से हो चुकी है और ये कल शाम लगभग 5 बजे तक रहेगी। लेकिन इस साल फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग लगभग 100 साल बाद बन रहा है। खास बात ये है कि ये चंद्र ग्रहण भारत में नजर आएगा। इसलिए इसका सूतक काल भी माना जाएगा, जिसकी शुरुआत सूबह लगभग 6 बजे से हो जाएगी। इसलिए होलिका दहन आज मध्यरात्रि में किया जाना शास्त्र सम्मत माना जा रहा है। वहीं, स्नान-दान की पूर्णिम कल सुबह होगी। चलिए जानें होली पूर्णिमा का मुहूर्त, पूजा विधि और कथा।

होली पूर्णिमा 2026 तिथि व मुहूर्त

होली पूर्णिमा का पावन पर्व 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। ये पूर्णिमा 2 मार्च की दोपहर 05:55 से 3 मार्च की शाम 05:07 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय समय शाम 05:51 बजे का है।

होली पूर्णिमा व्रत पूजा विधि

होली पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। ये व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखा जाता है। इसके बाद गाय के गोबर से होलिका का निर्माण करें। एक थाली में माला, गुड़, साबुत हल्दी, पुष्प, कच्चा सूत, गुलाल, नारियल, मूंग दाल, बताशे, रोली, गेहूं की बालियां और साथ में एक लोटा जल रखें। फिर भगवान नरसिंह का ध्यान करें और बनाई गई होलिका पर रोली, अक्षत, फूल, बताशे अर्पित करें। इसके बाद मौली को होलिका के चारों तरफ 7 या 11 बार लपेटें। इसके बाद प्रह्लाद का नाम लेकर होलिका पर पुष्प अर्पित करें। फिर भगवान नरसिंह का नाम लेते हुए होलिका पर 5 प्रकार के अनाज चढ़ाएं। इसके बाद होलिका दहन करें और फिर परिवार सहित उसकी परिक्रमा करें। होलिका की अग्नि में गुलाल जरूर डालें।

कब लग रहा है चंद्रग्रहण?

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