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Phalguna Amavasya 2026: कल भूल कर भी न करें ये गलतियां, जानें फाल्गुन अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं?

Phalguna Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या हिंदू कैलेंडर की अंतिम अमावस्या होती है। इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पितरों को समर्पित इस तिथि पर कुछ गलतियां भूल से नहीं करनी चाहिए। आइए जानें फाल्गुन अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं करें

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 16, 2026 पर 8:05 PM
Phalguna Amavasya 2026: कल भूल कर भी न करें ये गलतियां, जानें फाल्गुन अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं?
उदयातिथि के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या इस साल 17 फरवरी को होगी।

Phalguna Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये तिथि मुख्य रूप से पितरों को समर्पित है और माना जाता है कि इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। हमारे पूर्वज हमें आशीर्वाद देते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। अमावस्या पर गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान करने और उसके बाद दान-पुण्य करना बहुत फलदायी माना जाता है। हिंदू वर्ष में प्रत्येक माह में एक अमावस्या तिथि आती है, इस तरह कुल 12 अमावस्या तिथियां आती हैं। इन्हीं में से एक है फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि। फाल्गुन हिंदू कैलेंडर का अंतिम महीना होता है, इसलिए इसकी अमावस्या भी साल की अंतिम अमावस्या तिथि होती है। धार्मिक रूप से पूजा-पाठ और अनुष्ठान की दृष्टि से इसका अहम स्थान है। आइए जानें इस खास तिथि पर क्या करें और क्या न करें?

फाल्गुन अमावस्या कब है?

पंचाग के मुताबिक इस साल फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि 16 फरवरी का शाम 05 बजकर 34 पर आरंभ हो रही है। इस तिथि का अंत अगले दिन 17 फरवरी को शाम 05 बजकर 31 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या इस साल 17 फरवरी को होगी।

पितृ तर्पण और दान के लिए विशेष फलदायी

फाल्गुन मास की अमावस्या पितृ तर्पण और दान के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए तर्पण से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक ग्रंथों में इसे आत्मशुद्धि का भी दिन बताया गया है। होली से ठीक पहले पड़ने वाली यह अमावस्या पुराने नकारात्मक भावों को छोड़ने और नई शुरुआत की तैयारी का प्रतीक है।

इस दिन क्या करें?

सुबह स्नान और तर्पण : अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि गंगा या किसी भी नदी में स्नान करना संभव नहीं है तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद तिल और जल से पितरों का तर्पण करें।

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