Pradosh Vrat 2026: सावन के पहले प्रदोष व्रत पर बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें सही तारीख और सोम प्रदोष व्रत का मुहूर्त

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा का विधान है। आइए जानें सावन माह का पहला प्रदोष व्रत किस दिन किया जाएगा और पूजा मुहूर्त कितने बजे है

अपडेटेड Aug 07, 2026 पर 7:00 AM
इस साल सावन के पहले प्रदोष व्रत पर अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है।

Pradosh Vrat 2026: हिंदू कैलेंडर के हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है और प्रदोष काल में माता पार्वती के साथ भगवान की पूजा की जाती है। इस समय भगवान शिव का प्रिय सावन का महीना चल रहा है। इस माह में आने वाले प्रदोष व्रत का महत्व यूं ही बढ़ जाता है, क्योंकि यह तिथि भी भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है।

इस साल सावन के पहले प्रदोष व्रत पर अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया कि अगस्त माह का पहला प्रदोष व्रत सोमवार के दिन किया जाएगा। इसलिए इस प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। सावन के दूसरे सोमवार को इस माह का पहला प्रदोष व्रत होना बहुत शुभ माना जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से प्रदोष व्रत करने पर भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे सुख-समृद्धि, मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सफलता के योग बनते हैं।

कब है सावन का पहला प्रदोष व्रत?

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी शुभ तिथि 10 अगस्त को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। इस तिथि का समापन 11 अगस्त को प्रात: 04 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में सावन का पहला प्रदोष व्रत या सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त को है। इसके बाद सावन मास की मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 9 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक होगा।

सोम प्रदोष का क्या अर्थ है?

सावन माह में पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। जब त्रयोदशी तिथि सोमवार को आती है, तब उसे सोम प्रदोष कहा जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को विधि-विधान से करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या अशुभ प्रभाव दे रहा हो, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। संतान सुख, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की कामना से भी श्रद्धालु यह व्रत रखते हैं।


प्रदोष व्रत के जरूरी नियम

प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेलपत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें। फिर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें। शाम को पूजन के बाद ही अपना उपवास खोलें।

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