Pradosh Vrat June 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाले प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है। ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। शुक्रवार को प्रदोष व्रत होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष कहा जाएगा, जो जीवन में सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और वैवाहिक जीवन में मधुरता लाता है।
ज्येष्ठ अधिक मास का दूसरा व अंतिम प्रदोष व्रत
जून के महीने में पड़ने वाला यह प्रदोष व्रत ज्येष्ठ अधिक मास का आखिरी प्रदोष व्रत होगा। वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 जून को शाम 7 बजकर 36 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर होगा। ऐसे में जून का पहला प्रदोष व्रत 12 जून को रखा जाएगा। ये व्रत शुक्रवार के दिन पड़ेगा जिसके चलते ये शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस दिन पूजा का प्रदोष काल मुहूर्त 12 जून को शाम 07:36 बजे से रात 09:20 बजे तक रहेगा।
हिंदू मान्यता के अनुसार शुक्रवार के दिन पड़ने वाले शुक्र प्रदोष व्रत पर विधि-विधान से पूजा करने से साधक पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। साथ ही सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा शुक्र प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति के जीवन हमेशा धन-संपदा बनी रहती है और वह सुखी वैवाहिक जीवन जीता है।