Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के पर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह पर्व पूरे साल में आने वाले सभी उत्सव और त्योहारों में सबसे मासूम और प्यारा माना जाता है, क्योंकि ये भाई-बहन के बीच प्रेम और मधुरता का प्रतीक है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, सुखी जीवन और दीर्घायु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा और हर मुश्किल घड़ी में उसके साथ खड़े रहने का वचन देता है।
रक्षा बंधन के पर्व की शुरुआत पौराणिक काल से जुड़ी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवासुर संग्राम के समय सुदर्शन चक्र के कारण श्री कृष्ण की उंगली कट गई थी, जिससे उनकी उंगली से खून निकलने लगा। द्रौपदी ने यह दृश्य देखा और तुरंत अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर उनकी उंगली में बांध दिया। भगवान कृष्ण द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से भावुक हो गए। श्रीकृष्ण ने जीवन भर द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया और जब द्रौपदी के सम्मान पर संकट आया, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाकर अपना वचन निभाया। माना जाता है कि इस दिन बहनें राखी बांधने से पहले अगर एक उपाय कर लें, तो उससे भाइयों की तरक्की होती है। आइए जानें इस साल कब मनाया जाएगा राखी का त्योहार और क्या इस दिन रहेगा भद्रा का साया
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल सावन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट पर होगा और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा। चूंकि 28 अगस्त को पूर्णिमा उदया तिथि में रहेगी। इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। उदया तिथि के कारण 28 अगस्त को पूरे दिन त्योहार मनाया जा सकेगा।
रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव
शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में रक्षा बंधन वर्जित माना गया है। राहत की बात यह है कि 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं रहेगी। हालांकि सावन पूर्णिमा पर 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। लेकिन 28 अगस्त को पूर्णिमा उदया तिथि के साथ-साथ भद्रा रहित भी रहेगी।
राखी बांधने से पहले करें भगवान गणेश और विष्णु का पूजन
राखी बांधने से पहले भगवान गणेश और भगवान विष्णु का पूजन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पूजा में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन बहनें सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट के बीच अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। इस अवधि को रक्षा सूत्र बांधने के लिए शुभ माना गया है। इसके अलावा बहनें सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट के समय अभिजीत मुहूर्त में भी भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।