Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पावन पर्व सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन से सावन का महीना समाप्त माना जाता है। यह त्योहार भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि कामना करती हैं और भाई सदैव उनकी रक्षा का वचन देते हैं। इस साल यह पावन पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन कई बड़ी ज्योतिष और खगोलीय घटनाएं भी हो रही हैं, जिससे यह और खास हो गया है।
साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को होगा। काशी के ज्योतिषाचार्य स्वामी कन्हैया महाराज ने न्यूज 18 को बताया कि यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए राखी के त्योहार पर इसका कोई असर नहीं होगी। उन्होंने कहा, सालों बाद इस साल पूरे दिन रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों के कलाई पर राखी बांध सकेंगी और भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी। साथ ही, इस साल रक्षाबंधन पर 70 साल बाद ग्रह नक्षत्रों का अद्भुत संयोग बन रहा है जो भाई बहन के पवित्र रिश्ते की डोर को और मजबूत करेगा।
सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भद्रा 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रहा है। इस दिन शतभिषा नक्षत्र, अतिगंड योग का संयोग भी है। वहीं चंद्रमा भी शनि की राशि कुंभ में संचरण करेगा।
इस दिन सुबह 10 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 02 मिनट के बीच आप अपने भाइयों के कलाई पर भूलकर भी रक्षासूत्र न बांधे। यह समय राहुकाल का समय है।
रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण 2026?
चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जो शनि की राशि कुंभ और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा। ग्रहण की शुरुआत 28 अगस्त को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर होगी। इसका समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर माना जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी कारण इसका सूतक काल और इसके नियम दोनों ही मान्य नहीं रहेंगे।