Rakhi Bandhne Ke Niyam: रक्षा बंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन माह की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट रिश्ते, भरोसे और प्रेम का प्रतीक है। बहनें इस दिन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भगवान से उनके लिए लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद मांगती हैं। इस रक्षा सूत्र के बदले भाई अपने बहन की हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं।
इस दिन भाई और बहन को राखी बांधते समय कुछ बातों को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए। माना जाता है कि राखी बांधते समय सही दिशा और विधि का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से भाई-बहन के रिश्ते में मिठास बनी रहती है। साथ ही, जीवन में सकारात्मकता और खुशहाली आती है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राखी बांधते समय भाई और बहन दोनों की दिशा का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है :
भाई का मुख : राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। ज्योतिष और वास्तु दोनों ही शास्त्रों में इस दिशा को शुभ माना गया है। माना जाता है कि सही दिशा का ध्यान रखते हुए रक्षा बंधन करने पर जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। यह बात ध्यान रखनी बहुत जरूरी है कि राखी बांधते समय गलती से भी भाई का चेहरा दक्षिण दिशा की ओर नहीं होना चाहिए। यह दिशा यम और पितरों की होती है।
बहन का मुख : भाई का मुख पूर्व या उत्तर में होने पर बहन का मुख अपने आप पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर होगा। इस विधि से राखी बांधना शास्त्र सम्मत और सकारात्मक माना जाता है।
राखी बांधने के मुख्य नियम
अक्षत और तिलक : सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम/रोली का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत (चावल) लगाएं। ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों।
दाहिने हाथ की कलाई : राखी हमेशा भाई की दाहिनी कलाई पर ही बांधी जानी चाहिए।
तीन गांठें लगाएं : राखी बांधते समय उसमें 3 गांठें लगाना शुभ माना जाता है। ये तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु, महेश यानी त्रिदेव का प्रतीक मानी जाती हैं।
आरती उतारें : राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें, उसका मुंह मीठा कराएं और भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले या उससे छोटी बहन को आशीर्वाद व उपहार दे।
भद्रा काल और राहूकाल का ध्यान : भद्रा काल और राहूकाल में राखी बांधना वर्जित माना जाता है, इसलिए हमेशा शुभ मुहूर्त में ही रक्षासूत्र बांधें।