Sawan 2026: भगवान शिव का प्रिय माह सावन आज से शुरू हो गया है। यह समय देवाधिदेव की भक्ति में लीन होने के लिए ही खास नहीं माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना विभिन्न ग्रह दोषों से मुक्ति दिलाने के लिए भी जाना जाता है। महादेव, जिनके समक्ष काल भी स्वयं नतमस्तक होता है, वे आपको नवग्रह पीड़ा से मुक्ति प्रदान करेंगे। इससे मुक्ति के लिए आपको सावन में कुछ खास सामग्री युक्त जल से शिवलिंग का जलाभिषेक करना है। जिन लोगों की कुंडली में नवग्रह दोष होते हैं, उन्हें जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सावन में नियमित रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है।
सूर्य दोष : लखनऊ के ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय के अनुसार, सूर्य दोष से पीड़ित जातक श्वेतार्क यानि मदार या आक के पत्तों को पीसकर पवित्र जल या गंगाजल में मिलाकर शिव जी का अभिषेक कराएं।
चंद्र दोष : चंद्रमा के दोष ये जूझ रहे जातकों को सावन के महीने में नियमित रूप से पवित्र जल या गंगाजल में काले तिल को पीसकर महादेव का अभिषेक करना चाहिए।
मंगल दोष : कुंडली में मंगल दोष की वजह से कोई कष्ट या रोग है तो गिलोय के रस को पवित्र जल या गंगाजल में मिलाकर शिवजी का अभिषेक करना चाहिए।
बुध दोष : कुंडली में बुध ग्रह दूषित या खराब स्थिति में होने पर तरक्की में अड़चन आती रहती है। इस दोष से मुक्ति पाने के लिए विधारा के रस से महादेव का अभिषेक शुभ फल देने वाला माना जाता है।
शुक्र दोष : शुक्र दोष की वजह से सुख और सुविधाओं में कमी है, संतानहीन हैं या अन्य समस्याएं हैं तो गाय के दूध वाले छाछ से भोलेनाथ का अभिषेक करें।
शनि दोष : शनि के कष्टों से मुक्ति के लिए सावन में शमी के पत्ते को पीसकर पवित्र जल या गंगाजल में मिला लें। फिर उससे भगवान शंकर का अभिषेक करें।
राहु दोष : राहु की वजह से आपकी तरक्की नहीं हो पा रही है या कोई शारीरिक कष्ट है तो उसे दूर करने के लिए आप गंगाजल या पवित्र जल में दूर्वा मिलाकर महादेव का अभिषेक करें।
केतु दोष : कुंडली में केतु के दोषों को मिटाने के लिए गंगाजल या पवित्र जल में कुश की जड़ को पीसकर मिला लें। फिर उससे शिवजी का अभिषेक करें।