Sawan 2026: भगवान शिव का प्रिय महीना सावन इस दिन से होगा शुरू, जानें इस साल सावन में आएंगे कितने सोमवार

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव का प्र‍िय महीना माना जाता है। इस साल सावन का महीना कब से शुरू होगा और इसमें कितने सोमवार आएंगे? भक्‍तों में इस सवाल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इस सवाल के जवाब के साथ जानें इस साल कब होगा सावन के पहले सोमवार का व्रत

अपडेटेड Jun 02, 2026 पर 6:35 PM
इस बार पहला सावन सोमवार श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ रहा है।

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव का प्र‍िय महीना माना जाता है। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साल 2026 में सावन का महीना बेहद खास रहने वाला है। पंचांग के अनुसार, माना जा रहा है कि इस साल सावन का महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू होगा और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा। इस माह में सूर्य और चंद्र ग्रहण भी होंगे।

यूं तो सावन का पूरा महीना ही भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे अच्‍छा माना जाता है, लेकिन सावन के सोमवार को विशेष महत्‍व है। साल 2026 में सावन के महीने में कुल 4 सोमवार आएंगे, जिनमें श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। सावन में महादेव के भक्‍त अपने आराध्‍य के प्रति श्रद्धा व्‍यक्‍त करने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं और सावन के सोमवार को विशेष उपवास, पूजा और अभ‍िषेक का आयोज‍न करते हैं। आइए जानें इस साल सावन में कब-कब आएगा सोमवार?

पहला सावन सोमवार : 3 अगस्त 2026

दूसरा सावन सोमवार : 10 अगस्त 2026

तीसरा सावन सोमवार : 17 अगस्त 2026

चौथा सावन सोमवार : 24 अगस्त 2026


पहले सावन सोमवार के शुभ योग और मुहूर्त

इस बार पहला सावन सोमवार श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ रहा है। इस दिन उत्तरभाद्रपदा और रेवती नक्षत्र का संयोग रहेगा। साथ ही सुकर्मा और धृति योग भी बनेंगे, जो इसे और अधिक शुभ बना रहे हैं। चंद्रमा मीन राशि में विराजमान रहेंगे।

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:26 से 05:14 तक

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:07 से 12:59 तक

अमृत काल- शाम 05:07 से 06:44 तक

सावन सोमवार की पूजा विधि

पहले सावन सोमवार के दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और स्वच्छ जल से अभिषेक करें। भगवान शिव को 11 या 21 बेलपत्र, धतूरा, भांग और चंदन अर्पित करें। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। आप चाहें तो महामृत्युंजय मंत्र का भी जप कर सकते हैं। अंत में भगवान शिव की आरती कर पूजा को पूर्ण करें।

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