महादेव को प्रसन्न करने का शुभ दिन आज, सावन शिवरात्रि पर जानें पूजा का मुहूर्त और विधि

Sawan shivratri 2025: सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का विशेष पर्व है, जो सावन महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह दिन भक्तों के लिए बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दिन शिवभक्त व्रत, पूजा और जलाभिषेक के माध्यम से भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं

अपडेटेड Jul 23, 2025 पर 8:35 AM
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आज के दिन शिवभक्त व्रत, पूजा और जलाभिषेक के माध्यम से भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं

सावन शिवरात्रि 2025: भगवान शिव की आराधना का ये पर्व पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। सावन का महीना वैसे भी शिवभक्तों के लिए बेहद खास होता है, लेकिन इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि को महादेव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस बार यह पावन तिथि 23 जुलाई 2025, बुधवार को पड़ रही है। शिवरात्रि का यह पर्व उन भक्तों के लिए बेहद शुभ माना जाता है जो शिवलिंग पर जल चढ़ाकर, व्रत रखकर और मंत्र जाप के माध्यम से भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं।

मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। यही कारण है कि देशभर में इस दिन शिव मंदिरों में विशेष भीड़ और पूजा का माहौल देखने को मिलता है

क्यों मनाई जाती है सावन शिवरात्रि?

पूरे सावन का महीना शिव की आराधना से जुड़ा होता है, लेकिन शिवरात्रि की रात को विशेष रूप से आध्यात्मिक जागरण, व्रत, और रात्रि पूजन का महत्व है। माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक शिवलिंग पर जलाभिषेक और मंत्र जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पापों का नाश होता है।

कब करें जलाभिषेक? जानिए आज के सबसे शुभ मुहूर्त

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए 23 जुलाई को दो विशेष मुहूर्त बताए गए हैं:


प्रथम जलाभिषेक मुहूर्त: सुबह 4:15 बजे से 4:56 बजे तक

द्वितीय जलाभिषेक मुहूर्त: सुबह 8:32 बजे से 10:02 बजे तक

इन समयों में जल, दूध, बेलपत्र, और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने से पुण्य फल प्राप्त होता है।

सावन शिवरात्रि पर चार पहर की पूजा का महत्व

इस दिन रात्रि में भगवान शिव की चार पहरों की पूजा का विशेष महत्व होता है। हर पहर में अलग-अलग विधियों से पूजन कर शिव तत्त्व का आह्वान किया जाता है।

प्रथम पहर: शाम 7:26 बजे से रात 10:06 बजे तक

द्वितीय पहर: रात 10:06 बजे से 12:46 बजे (24 जुलाई) तक

तृतीय पहर: 24 जुलाई की रात 12:46 से सुबह 3:27 बजे तक

चतुर्थ पहर: सुबह 3:27 बजे से 6:07 बजे तक

निशिता काल पूजन: रात 12:25 से 1:08 बजे (24 जुलाई की रात)

ऐसे करें सावन शिवरात्रि की पूजा, मिलेगा विशेष फल

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें

व्रत रखें और केवल फल, दूध या पानी का सेवन करें

शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, गंगाजल, शहद, दही, चंदन आदि अर्पित करें

"नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें

चार पहरों में विधिवत पूजन करें और रात को जागरण करें

क्या है सावन शिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व?

सावन शिवरात्रि केवल पूजा का दिन नहीं, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और ध्यान का अवसर भी है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव ध्यान की गहराई में रहते हैं और जो भी भक्त सच्चे मन से उन्हें याद करता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।

सावन शिवरात्रि पर पूजा करने से:

विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं

स्वास्थ्य और समृद्धि का वरदान मिलता है

पितृ दोष और कालसर्प दोष जैसी परेशानियों से मुक्ति मिलती है

आध्यात्मिक उन्नति और शांति की प्राप्ति होती है

किन राज्यों में होती है सावन शिवरात्रि की सबसे खास धूम?

उत्तर भारत में यह पर्व विशेष रूप से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और बिहार में धूमधाम से मनाया जाता है। काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकाल, बैद्यनाथ और बद्रीनाथ जैसे प्रमुख शिव मंदिरों में लाखों श्रद्धालु पूजा करने पहुंचते हैं और गंगाजल से अभिषेक करते हैं।

क्यों है यह दिन शुभ कामों और भक्तिमार्ग के लिए आदर्श?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर की गई पूजा व्यक्ति को आध्यात्मिक बल, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख प्रदान करती है। यह दिन सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने और शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय माना जाता है।

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