Som Pradosh Vrat 2026: आज सावन माह के दूसरे सोमवार का व्रत किया जा रहा है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है और सावन का महीना उनका प्रिय समय माना जाता है। इसलिए हिंदू धर्म में सावन माह के सोमवार के व्रत का विशेष महत्व है। इसके साथ ही आज सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जिसमें प्रदोष व्रत किया जाता है। यह तिथि सोमवार के पड़ रही है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और फलदायी व्रत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोम प्रदोष का व्रत रखने से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आज के दिन किया गया व्रत 24 प्रदोष व्रत के बराबर फल देता है।
पूजा का शुभ समय (प्रदोष काल)
पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त 2026 को सुबह 04 बजकर 30 मिनट पर प्रारंभ हो चुकी है और 11 अगस्त 2026 को सुबह 01 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष पूजा का मुहूर्त रात 09 बजकर 15 मिनट से रात 11 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। पूजन की कुल अवधि 01 घंटा 53 मिनट की है।
सोम प्रदोष व्रत 2026 पारण
सोम प्रदोष व्रत का पारण 11 अगस्त 2026, मंगलवार को किया जाएगा। प्रदोष व्रत सूर्योदय से प्रारंभ होकर अगले दिन सूर्योदय तक रखा जाता है। 11 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5:47 बजे होगा। जिसके बाद व्रत का पारण किया जा सकेगा।
चंद्र दोष से मुक्ति : चूंकि सोमवार का संबंध चंद्रमा से है, इसलिए इस व्रत को करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और मानसिक शांति मिलती है।
संतान व सुख-समृद्धि : यह व्रत आरोग्य, सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति के लिए विशेष रूप से लाभदायक माना गया है।
सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रातः काल : सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
दिनभर : दिन में केवल जलाहार या फलाहार ग्रहण करें (निराजल या फलाहारी अपनी क्षमतानुसार रहें)। मन ही मन "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते रहें।
प्रदोष काल (संध्या समय पूजा): स्नान करके पुनः स्वच्छ (सफेद या हल्के रंग के) वस्त्र पहनें। शिव मंदिर जाए या घर पर ही शिवलिंग की पूजा करें।
अभिषेक : शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, और गंगाजल चढ़ाकर अभिषेक करें।
सामग्री : बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद फूल, अक्षत (अखंडित चावल), और चंदन अर्पित करें।
कथा व आरती : सोम प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें और अंत में धूप-दीप जलाकर आरती करें।
महामृत्युंजय मंत्र : ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
पंचाक्षर मंत्र : ॐ नमः शिवाय
24 प्रदोष में से किसी भी एक प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में एक लोटा जल और एक घी का दीपक लेकर शिव मंदिर जाएं। वहां भगवान शिव का जल से जलाभिषेक करें और हाथ का स्पर्श शिवलिंग से कराकर भगवान शिव के सामने घी का दीपक प्रज्वलित कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से साल भर के सभी प्रदोष व्रत का फल सिर्फ एक प्रदोष व्रत में ही प्राप्त हो जाता है।