Somvati Amavasya In Purushottam Maas: हिंदू धर्म में कुछ तिथियां और संयोग बेहद अहम माने जाते हैं। इस दिन स्नान-दान के साथ ही पूजा आदि का विशेष महत्व होता है। ऐसा ही एक दिन है सोमवती अमावस्या का। किसी माह में जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन होती है, उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। सोमवती अमावस्या धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण तिथि है, जो लंबे अंतराल के बाद आती है। इस साल की सोमवती अमावस्या और भी खास है, क्योंकि यह ज्येष्ठ अधिकमास में आ रही है।
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों के स्नान के बाद तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा बनी रहती है। विवाहित महिलाओं के लिए भी यह दिन बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन किए गए व्रत और पूजा से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता।
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून, सोमवार को की जाएगी। इस दिन सुबह का समय स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।
सोमवती अमावस्या शुभ मुहूर्त
सोमवती अमावस्या पर करें ये उपाय
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में सोमवती अमावस्या का पड़ना एक अत्यंत दुर्लभ संयोग है। उन्होंने बताया कि धार्मिक दृष्टि से यह संयोग बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। पुरुषोत्तम मास की अमावस्या भी पितृ शांति और तर्पण के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन पितरों के नाम से तिल, जल और सफेद पुष्प अर्पित कर तर्पण करने से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, पितृ दोष का प्रभाव भी कम होता है।