Somvati Amavasya In Purushottam Maas: 3 साल बाद अधिकमास में सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग, पितृ दोष शांति के लिए इस दिन करें ये उपाय

Somvati Amavasya In Purushottam Maas: अध‍िकमास में 3 साल आने वाले अमावस्‍या तिथ‍ि पर सोमवती अमावस्‍या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन पितृ दोष शांति के लिए कुछ कारगर उपाय किए जा सकते हैं। आइए जानें अमावस्‍या की तारीख और उपाय

अपडेटेड Jun 04, 2026 पर 9:03 PM
सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून, सोमवार को की जाएगी।

Somvati Amavasya In Purushottam Maas: हिंदू धर्म में कुछ तिथियां और संयोग बेहद अहम माने जाते हैं। इस दिन स्‍नान-दान के साथ ही पूजा आदि का विशेष महत्‍व होता है। ऐसा ही एक दिन है सोमवती अमावस्‍या का। किसी माह में जब अमावस्‍या तिथ‍ि सोमवार के दिन होती है, उसे सोमवती अमावस्‍या कहते हैं। सोमवती अमावस्‍या धार्मिक रूप से बेहद महत्‍वपूर्ण तिथ‍ि है, जो लंबे अंतराल के बाद आती है। इस साल की सोमवती अमावस्‍या और भी खास है, क्‍योंकि यह ज्‍येष्‍ठ अध‍िकमास में आ रही है।

हिंदू धर्म में अमावस्‍या तिथ‍ि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों के स्‍नान के बाद तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्‍न होते हैं और अपने वंशजों को सुख समृद्ध‍ि का आशीर्वाद देते हैं। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा बनी रहती है। विवाहित महिलाओं के लिए भी यह दिन बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन किए गए व्रत और पूजा से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता।

सोमवती अमावस्या तिथि

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून, सोमवार को की जाएगी। इस दिन सुबह का समय स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।

सोमवती अमावस्या शुभ मुहूर्त

अमृत और सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इस शुभ समय में स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक, पितरों का तर्पण और जरूरतमंद लोगों को दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और पूर्वजों का आशीर्वाद लेकर आती है।


सोमवती अमावस्‍या पर करें ये उपाय

देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में सोमवती अमावस्या का पड़ना एक अत्यंत दुर्लभ संयोग है। उन्होंने बताया कि धार्मिक दृष्टि से यह संयोग बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। पुरुषोत्तम मास की अमावस्या भी पितृ शांति और तर्पण के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन पितरों के नाम से तिल, जल और सफेद पुष्प अर्पित कर तर्पण करने से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, पितृ दोष का प्रभाव भी कम होता है।

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