Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण एक सामान्य लेकिन दिलचस्प खगोलीय घटना है। निश्चित अंतराल पर जब भी धरती, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आते हैं, तब सूर्य और चंद्र ग्रहण लगते हैं। ग्रहण विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का आधार भी बनते हैं, तो तीनों खगोलीय पिंडों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का मौका भी देते हैं। विज्ञान के साथ-साथ इसके गहरे धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव माने जाते हैं।
हिंदू धर्म में ग्रहण को अशुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रभावी रहती हैं, इसलिए इस समय कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। हर साल की तरह इस साल भी दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण लगेंगे। इनमें से पहला सूर्य और चंद्र ग्रहण फरवरी-मार्च में हो चुका है। इसके अब दूसरा और अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण अगस्त के महीने में लगेगा। इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन कर्क राशि में लगेगा।
अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण
साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त हरियाली अमावस्या के मौके पर लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा। भारतीय समयानुसार, ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा।
कर्क राशि वाले रहें सतर्क
किन-किन देशों में दिखाई देगा ग्रहण?
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर, आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन में देखा जाएगा। साथ ही फ्रांस, ब्रिटेन, इटली सहित यूरोप के कई देशों में भी यह आंशिक रूप से नजर आने वाला है।
ग्रहण काल में अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ग्रहण काल के बाद पूजा-पाठ और इच्छा के अनुसार दान करना चाहिए।
ग्रहण काल के बाद नहाना चाहिए और शिवलिंग पर जला अर्पित करना चाहिए।