YouTube से कमाई होगी और मुश्किल! मोनेटाइजेशन के लिए आने वाले वॉच टाइम और शॉर्ट्स व्यू के नए रूल जानिए
YouTube ने 2018 के बाद पहली बार अपने पार्टनर प्रोग्राम में शामिल होने की शर्तों को कड़ा किया है। नए क्रिएटर्स को अब विज्ञापनों और प्रीमियम सब्सक्रिप्शन से कमाई शुरू करने के लिए पहले से लगभग दोगुनी शर्तें पूरी करनी होंगी। बता दें कि ये बदलाव 1 फरवरी 2027 से लागू होंगे।
YouTube Partner Program requirements 2027: YouTube ने 2018 के बाद पहली बार अपने पार्टनर प्रोग्राम में शामिल होने की शर्तों को कड़ा किया है। नए क्रिएटर्स को अब विज्ञापनों और प्रीमियम सब्सक्रिप्शन से कमाई शुरू करने के लिए पहले से लगभग दोगुनी शर्तें पूरी करनी होंगी। बता दें कि ये बदलाव 1 फरवरी 2027 से लागू होंगे।
हालांकि, मौजूदा पार्टनर्स पर इन नई शर्तों का कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन उन्हें तय समय-सीमा से पहले कुछ जरूरी काम करना होगा।
क्या बदल रहा है
YouTube ने 1,000 सब्सक्राइबर की शर्त में कोई बदलाव नहीं किया है। बदलाव सिर्फ वॉच ऑवर्स और Shorts व्यूज की सीमा में किया गया है। अब क्रिएटर को 1,000 सब्सक्राइबर्स के साथ इन दोनों में से किसी एक की नई तय सीमा पूरी करनी होगी।
वहीं, Fan Funding और YouTube Shopping के लिए जरूरी शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा, 500 सब्सक्राइबर वाला अलग YPP टियर भी पहले की तरह जारी रहेगा।
तीन ऐसे नंबर जिनमें अक्सर कन्फ्यून हो जाता है
YouTube ने सोमवार को तीन अलग-अलग तरह की शर्तों का ऐलान किया है, लेकिन इनकी खबरों में अक्सर आपस में गड़बड़ हो रही है। दरअसल, इन तीनों का काम अलग-अलग है।
10 मिलियन का आंकड़ा मौजूदा Shorts क्रिएटर्स के लिए सबसे अहम है। अगर किसी क्रिएटर के Shorts को 90 दिनों में 10 मिलियन से कम व्यूज मिलते हैं, तो उसकी Shorts से होने वाली कमाई कुछ समय के लिए रुक सकती है। हालांकि, जैसे ही पिछले 90 दिनों के व्यूज फिर से 10 मिलियन के आंकड़े को पार कर जाते हैं, कमाई अपने आप शुरू हो जाएगी। यानी क्रिएटर को YouTube Partner Program से बाहर नहीं किया जाएगा।
एक्टिविटी के मामले में, YouTube चाहता है कि चैनल्स या तो पिछले एक साल में 1,000 वॉच आवर्स (देखने का समय) पूरे करें, या 1 मिलियन Shorts व्यूज हासिल करें, या फिर हर 90 दिनों में दो लॉन्ग-फॉर्म वीडियो या पांच Shorts अपलोड करें।
मौजूदा पार्टनर के लिए जरूरी डेडलाइन
जो क्रिएटर्स पहले से ही पार्टनर प्रोग्राम में शामिल हैं, उन्हें कमाई जारी रखने के लिए 31 जनवरी 2027 तक YouTube Studio में अपडेट की गई शर्तों को देखना और स्वीकार करना होगा। हालांकि, नए एंट्री क्राइटेरिया (शामिल होने की शर्तें) उन पर लागू नहीं होते, लेकिन एग्रीमेंट लागू होता है।
बता दें कि यह एक ही एडमिनिस्ट्रेटिव स्टेप है और इस घोषणा में सबसे जरूरी काम यही है।
YouTube ऐसा क्यों कर रहा है?
YouTube के मुताबिक, इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह प्लेटफॉर्म का लगातार बढ़ता स्केल है। YouTube पर अब हर दिन 200 अरब से ज्यादा Shorts व्यूज आते हैं। इसके अलावा, लोग रोजाना टीवी स्क्रीन पर YouTube को 1 अरब घंटे से ज्यादा देखते हैं। वहीं, YouTube Partner Program में शामिल क्रिएटर्स की संख्या 30 लाख से ज्यादा हो चुकी है।
YouTube का तर्क है कि 2018 में तय किए गए क्राइटेरिया (सीमाओं) का अब पहले जैसा मतलब नहीं रह गया है। इन्हें बढ़ाने से नए इंसेंटिव प्रोग्राम के लिए फंड मिलेगा, न कि सिर्फ ऐड रेवेन्यू पर निर्भर रहना पड़ेगा। इनमें YouTube Shopping से जुड़े बोनस, ब्रांड डील्स के लिए इंसेंटिव और ट्रेंड्स शुरू करने व उन्हें बढ़ाने पर कमाई में बढ़ोतरी शामिल है। इसकी डिटेल बाद में दी जाएगी।
एक नया टारगेटेड Shorts Ads प्रोडक्ट भी लॉन्च किया जा रहा है। इसमें अगर कोई विज्ञापनदाता पांच या उससे कम YouTube चैनलों को टारगेट करता है, योग्य क्रिएटर्स को रेवेन्यू का सीधा 45% हिस्सा मिलता है।
कंपनी का कहना है कि उसे उम्मीद है कि 2026 की तुलना में 2027 में क्रिएटर्स को ज्यादा भुगतान किया जाएगा।
Premium Lite अब दुनिया भर में उपलब्ध, जानें भारत में इसकी कीमत क्या है
इन बदलावों के साथ, YouTube ने Premium Lite को उन सभी देशों में उपलब्ध करा दिया है जहां स्टैंडर्ड प्रीमियम मिलता है। यह सस्ता प्लान कुछ विज्ञापनों को हटा देता है और ज्यादातर कंटेंट के लिए ऑफलाइन डाउनलोड और बैकग्राउंड प्लेबैक की सुविधा देता है।
Premium Lite से मिलने वाली सब्सक्रिप्शन की कमाई क्रिएटर्स के पूल में जाती है। यह पैसा वॉच टाइम और व्यूज के आधार पर बांटा जाता है। इसमें 55% हिस्सा लॉन्ग-फॉर्म वीडियो के लिए और 45% हिस्सा शॉर्ट्स के लिए होता है। YouTube का कहना है कि ज्यादा सब्सक्राइबर्स का मतलब है ज्यादा कमाई, जिससे विज्ञापन दिखाने के लिए जरूरी कड़े नियमों की भरपाई हो जाती है।
प्रतिक्रिया
YouTube के इस ऐलान को क्रिएटर्स की तरफ से अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला है। कई क्रिएटर्स का कहना है कि 8,000 वॉच ऑवर्स या 2 करोड़ Shorts व्यूज हासिल करना आसान नहीं है, खासकर तब जब चैनल को इस दौरान कोई कमाई न हो।
क्रिएटर्स की चिंता साफ है। एंट्री की शर्तें दोगुनी होने का मतलब है कि चैनल को कमाई शुरू करने से पहले ज्यादा लंबे समय तक बिना कमाई के काम करना पड़ेगा। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे क्रिएटर्स पर पड़ सकता है, जिन्हें शुरुआत में ही लगातार कंटेंट बनाने के लिए ज्यादा मेहनत और संसाधनों की जरूरत होती है।
YouTube ने भले ही क्रिएटर्स की कमाई बढ़ाने के लिए नए इंसेंटिव प्रोग्राम की बात तो कही है, लेकिन ये प्रोग्राम वास्तव में नई शर्तों की भरपाई कर पाएंगे या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। इसकी वजह है कि कंपनी ने इन योजनाओं की पूरी जानकारी अभी जारी नहीं की है।