अरबपति बिजनेसमैन एलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) भारत में एंट्री कर रही है। इस सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर को जुलाई की शुरुआत में भारत की स्पेस रेगुलेटर IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) से अंतिम मंजूरी भी मिल गई। अब सब इंतजार कर रहे हैं कि कब मस्क जल्द से जल्द भारत में इंटरनेट सेवा शुरू करें। लेकिन हर किसी को स्टारलिंक का कनेक्शन नहीं मिलने वाला है।
इसकी वजह है कि सरकार ने स्टारलिंक के कनेक्शंस और इसके इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। दूरसंचार राज्यमंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने सोमवार, 28 जुलाई को कहा कि स्टारलिंक भारत में केवल 20 लाख कनेक्शन दे सकती है। अब आप सोच रहे होंगे कि भला यह बंदिश क्यों। तो बता दें कि सरकार ने ऐसा इसलिए किया है ताकि स्टारलिंक, सरकारी कंपनी BSNL समेत देश की बाकी टेलिकॉम कंपनियों के लिए खतरा न बने।
कितनी रहेगी इंटरनेट स्पीड
पेम्मासानी चंद्रशेखर ने BSNL की रिव्यू मीटिंग के मौके पर कहा, ‘‘स्टारलिंक के भारत में केवल 20 लाख ग्राहक हो सकते हैं और वह 200 MBPS तक की इंटरनेट स्पीड ही दे सकती है। इससे दूरसंचार सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।’’ सैटकॉम सर्विसेज के जरिए ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों को टारगेट किया जाएगा और इन इलाकों में BSNL की अच्छी मौजूदगी है। भारत में इंटरनेट की मैक्सिमम स्पीड 1 GBPS तक पहुंच चुकी है।
क्या रहेगी सैटकॉम सर्विसेज की कॉस्ट
पेम्मासानी चंद्रशेखर ने कहा कि सैटकॉम सर्विसेज की शुरुआती लागत बहुत ज्यादा होगी और मासिक लागत लगभग 3,000 रुपये हो सकती है। यह भी बताया कि BSNL की 4जी सर्विस शुरू करने का काम पूरा हो चुका है और अभी इसके टैरिफ रेट बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। मस्क की स्टारलिंक Eutelsat-OneWeb और रिलायंस जियो के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए पूरी मंजूरी हासिल करने वाली तीसरी कंपनी है।
स्टारलिंक को अब सरकार से स्पेक्ट्रम हासिल करना होगा। उसे देशभर में ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के हिसाब से टेस्टिंग करनी होगी। कंपनी की योजना भारत में कम से कम तीन गेटवे स्टेशन स्थापित करने की है।