30 डॉलर में मिली 1951 की दुर्लभ पेंटिंग, 70 साल बाद सामने आई असली कीमत और 13 करोड़ में हुई नीलामी
अमेरिका के मिशिगन में एक कलेक्टर पुराने विनाइल रिकॉर्ड खरीदने पहुंचा था, लेकिन उसकी नजर एक पेंटिंग पर टिक गई। महज 30 डॉलर में खरीदी गई यह कलाकृति बाद में करोड़ों की निकली। पेंटिंग के पीछे लिखे एक नाम ने उसकी पहचान का रास्ता खोला और फिर सामने आई ऐसी कहानी, जिसने सभी को हैरान कर दिया
न्यूयॉर्क में फ्रीमैन की नीलामी में यह पेंटिंग 13,52,600 डॉलर में बिकी।
कभी-कभी किसी साधारण सी खरीद के पीछे ऐसी कहानी छिपी होती है, जिसका अंदाजा खरीदार को भी नहीं होता। अमेरिका के मिशिगन में एक कलेक्टर के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जब वह पुराने विनाइल रिकॉर्ड तलाशने के लिए एक एस्टेट सेल में पहुंचा। वहां उसकी नजर एक पेंटिंग पर पड़ी और उसने उसे महज 30 डॉलर यानी करीब 2,800 रुपये में खरीद लिया। उस वक्त यह सिर्फ एक पुरानी कलाकृति थी, लेकिन कुछ समय बाद इसकी पहचान ने सबको हैरान कर दिया। पेंटिंग के पीछे लिखे एक नाम ने कलेक्टर को इसकी असली कहानी जानने के लिए प्रेरित किया।
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह मशहूर कलाकार गर्ट्रूड एबरक्रॉम्बी की बनाई दुर्लभ पेंटिंग है, जो दशकों से लोगों की नजरों से दूर थी। इसके बाद यह कलाकृति नीलामी तक पहुंची, जहां इसकी कीमत इतनी बढ़ी कि 30 डॉलर में हुई यह खरीद करोड़ों रुपये की डील में बदल गई।
पेंटिंग के पीछे लिखा था एक नाम, यहीं से बदली कहानी
पेंटिंग खरीदने के बाद कलेक्टर ने उसे पलटकर देखा। पीछे उसे ‘Abercrombie’ नाम दिखाई दिया। यह नाम उसकी उत्सुकता बढ़ाने के लिए काफी था। जांच करने पर पता चला कि यह 1951 में मशहूर शिकागो कलाकार गर्ट्रूड एबरक्रॉम्बी द्वारा बनाई गई पेंटिंग ‘Alderman Merriam's Shells’ है। इसके बाद इस साधारण दिखने वाली पेंटिंग की असली कहानी धीरे-धीरे सामने आने लगी।
70 साल से लोगों की नजरों से दूर थी कलाकृति
इस खोज को खास बनाने वाली एक और वजह थी। यह पेंटिंग करीब 70 वर्षों से सार्वजनिक नजरों से गायब थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कलाकृति मिशिगन के कलामाजू में रहने वाले डॉक्टर जॉन टी. रेनॉल्ड्स के परिवार के संग्रह में मौजूद थी। दशकों तक यह पेंटिंग परिवार के पास रही, लेकिन इसकी ऐतिहासिक और कलात्मक अहमियत आम लोगों की नजरों से छिपी रही।
इलाज के बदले कलाकार ने डॉक्टर को दी थी पेंटिंग
इस पेंटिंग का कनेक्शन 1952 से जुड़ा है। बताया जाता है कि गर्ट्रूड एबरक्रॉम्बी ने डॉक्टर रेनॉल्ड्स को इलाज के बदले यह कलाकृति दी थी।
इसके बाद पेंटिंग न्यूयॉर्क, शिकागो, मिलवॉकी और इवान्स्टन में 1952 और 1953 के दौरान आयोजित प्रदर्शनियों में दिखाई गई। लेकिन इन प्रदर्शनियों के बाद यह अचानक सार्वजनिक दृश्य से गायब हो गई और लंबे समय तक परिवार के निजी संग्रह में ही रही।
आखिर पेंटिंग में ऐसा क्या खास था?
पेंटिंग में गहरे रंग की पृष्ठभूमि के सामने कई समुद्री सीपियां दिखाई देती हैं। इनमें एक सीपी लगभग काले खाली स्थान में तैरती हुई नजर आती है, जो तस्वीर को रहस्यमयी रूप देती है। इस कलाकृति की एक खासियत यह भी मानी जाती है कि इसमें टूटी हुई सीपी का मोटिफ दिखाई देता है। बाद में यह एबरक्रॉम्बी की कला में बार-बार नजर आया।
नीलामी से पहले कीमत का लगाया गया था छोटा अनुमान
नीलामी से पहले पेंटिंग की हालत सुधारने और उसे संरक्षित करने के लिए शिकागो की बाउमगार्टनर फाइन आर्ट रेस्टोरेशन में काम कराया गया। इसके बाद विशेषज्ञों ने इसकी शुरुआती कीमत 15 हजार से 2.5 लाख डॉलर के बीच आंकी थी। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 14.45 लाख रुपये से 2.41 करोड़ रुपये तक बैठती है। लेकिन नीलामी में जो हुआ, उसने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया।
2,800 रुपये की पेंटिंग 13 करोड़ रुपये में बिकी
न्यूयॉर्क में फ्रीमैन की नीलामी में यह पेंटिंग 13,52,600 डॉलर में बिकी। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब 13 करोड़ रुपये बैठती है, जिसमें खरीदार का प्रीमियम भी शामिल है। यानी जिस कलाकृति के लिए कलेक्टर ने सिर्फ 30 डॉलर खर्च किए थे, उसकी कीमत बाद में लाखों डॉलर तक पहुंच गई। इतना ही नहीं, इस बिक्री ने गर्ट्रूड एबरक्रॉम्बी की किसी कलाकृति की बिक्री का नया विश्व नीलामी रिकॉर्ड भी बना दिया।
एक छोटी-सी नजर ने खोल दिया करोड़ों का राज
इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात यही है कि कलेक्टर उस दिन किसी दुर्लभ पेंटिंग की तलाश में निकला ही नहीं था। वह तो सिर्फ पुराने रिकॉर्ड खरीदने गया था। लेकिन पेंटिंग के पीछे लिखा एक नाम उसकी नजर में आया और उसने उसकी पूरी कहानी जानने की कोशिश की। एक मामूली एस्टेट सेल से शुरू हुई यह खोज आखिरकार करोड़ों रुपये की नीलामी तक पहुंची। यह किस्सा बताता है कि कभी-कभी घर के किसी पुराने कोने में पड़ी चीज की असली कीमत उसकी दिखने वाली कीमत से कहीं ज्यादा हो सकती है।