कहते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, लेकिन बहुत कम लोग इस बात को अपने जीवन में सच साबित कर पाते हैं। समय के साथ जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, सपने पीछे छूट जाते हैं और कई बार अधूरी पढ़ाई सिर्फ एक याद बनकर रह जाती है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो उम्र और परिस्थितियों की सीमाओं को चुनौती देकर अपने अधूरे सपनों को फिर से जीने का साहस जुटाते हैं। यही वजह है कि जब कोई लंबे अंतराल के बाद शिक्षा की राह पर लौटता है, तो उसकी कहानी सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रह जाती, बल्कि हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन जाती है।
