500 पौधे, 100 तरह के पक्षी: 23 साल के अमन शर्मा ने कैसे एक बंजर छत को बन डाला शहरी जंगल?

अमन शर्मा दिल्ली के रहने वाले एक वाइल्डलाइफ लवर, बर्डवॉचर (पक्षियों को निहारने वाले) और क्लाइमेट एडवोकेट हैं। बचपन से ही उन्हें प्रकृति से गहरा लगाव था, जो आगे चलकर भारतीय शहरों में वन्यजीवों को वापस लाने का एक बड़ा मिशन बन गया

अपडेटेड Jun 17, 2026 पर 1:19 PM
500 पौधे, 100 तरह के पक्षी: 23 साल के अमन शर्मा ने कैसे एक बंजर छत को बन डाला शहरी जंगल?

जब हम दिल्ली जैसे महानगर के बारे में सोचते हैं, तो आंखों के सामने सिर्फ ऊंची इमारतें, गाड़ियां और प्रदूषण ही आता है। लेकिन इसी कंक्रीट के जंगल के बीच एक ऐसी छत भी है, जो आज पशु-पक्षियों का गुप्त ठिकाना बन चुकी है। दिल्ली के रहने वाले 23 साल के युवा पर्यावरणविद् अमन शर्मा ने अपनी 1,500 स्क्वायर फीट की सूनी छत को एक घने शहरी जंगल (अर्बन रेनफॉरेस्ट) में बदल दिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने यह कमाल तब कर दिखाया था, जब वह महज 19 साल के थे।

आज इस छत पर 500 से ज्यादा पौधे लहलहा रहे हैं। यहां सिर्फ हरियाली ही नहीं है, बल्कि तितलियां, मधुमक्खियां और 100 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षी इस मिनी जंगल में अपना बसेरा ढूंढ चुके हैं।


कौन हैं अमन शर्मा और कैसे शुरू हुआ यह सफर?

अमन शर्मा दिल्ली के रहने वाले एक वाइल्डलाइफ लवर, बर्डवॉचर (पक्षियों को निहारने वाले) और क्लाइमेट एडवोकेट हैं। बचपन से ही उन्हें प्रकृति से गहरा लगाव था, जो आगे चलकर भारतीय शहरों में वन्यजीवों को वापस लाने का एक बड़ा मिशन बन गया।

इस सफर की शुरुआत बेहद दिलचस्प है। अमन के घर के पास 'बुलबुल' के एक जोड़े ने घोंसला बनाया था। उन नन्हे पक्षियों को देखकर अमन के मन में शहरी वन्यजीवों के प्रति उत्सुकता जगी। उन्हें एहसास हुआ कि शहरों की इस भागदौड़ के बीच भी कितनी तरह के जीव-जंतु हमारे साथ रहते हैं। बस, इसी एक अनुभव ने उन्हें प्रकृति संरक्षण की राह पर डाल दिया।

लॉकडाउन में सूझा अनोखा आइडिया

यह बात साल 2020 के Covid-19 लॉकडाउन की है। 19 साल के अमन घर में कैद थे और बाहर जंगलों या पक्षियों को देखने नहीं जा पा रहे थे। तब उन्होंने सोचा कि क्यों न अपने ही घर की छत को हरा-भरा बनाया जाए। उन्होंने पौधे लगाना शुरू किया और धीरे-धीरे उनकी सूनी छत एक शानदार और जीवंत इकोसिस्टम में बदल गई।

500 पौधे और 100 पक्षियों का अनोखा घर

अमन ने अपनी छत पर खास तौर पर भारत के स्थानीय पौधे लगाए, जिनमें फूल और फल आते हैं। ये पौधे पक्षियों को भोजन और रहने की सुरक्षित जगह देते हैं। देखते ही देखते वहां झाड़ियां घनी हो गईं, जिससे कीड़े-मकोड़े आकर्षित हुए। कीड़ों को खाने के लिए पक्षी और परागण करने वाले जीव (जैसे तितलियां और मधुमक्खियां) भी आने लगे। इस तरह देश की राजधानी के बीचों-बीच एक पूरा का पूरा नेचर साइकिल काम करने लगा।

वैज्ञानिक क्यों मान रहे हैं इसे बेहद जरूरी?

आज जब पूरी दुनिया में तेजी से शहर बढ़ रहे हैं और जंगल कट रहे हैं, वैज्ञानिक अमन के इस प्रयास को बहुत बड़ी उम्मीद के रूप में देख रहे हैं। रिसर्चर्स का मानना है कि शहरों के बीच बने ये छोटे-छोटे हरे-भरे इलाके जीव-जंतुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण घर साबित हो सकते हैं।

ये जगहें मधुमक्खियों और तितलियों को बचाने और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।

क्या छत पर बने ये जंगल रोक पाएंगे ग्लोबल वार्मिंग?

विशेषज्ञों के मुताबिक, शहरों में बढ़ते तापमान और प्रदूषण से लड़ने के लिए ऐसी पहल बेहद जरूरी हैं। छत पर बने ये मिनी जंगल शहरों को ठंडा रखने में मदद करते हैं, बारिश के पानी को सोखते हैं और हवा की क्वालिटी को भी सुधारते हैं। आने वाले समय में बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने के लिए रूफटॉप गार्डन सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकते हैं।

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