Travel Tips: फ्लाइट में फोन ऑन रखा तो क्या होगा? सच जानकर चौंक जाएंगे

Travel Tips: फ्लाइट के टेक-ऑफ से पहले यात्रियों को फोन एयरप्लेन मोड पर रखने के लिए कहा जाता है। यह नियम सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा होता है। ऐसा करने से फोन के सिग्नल बंद हो जाते हैं, जिससे विमान के कम्युनिकेशन और नेविगेशन सिस्टम में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं होता और यात्रा सुरक्षित बनी रहती है

अपडेटेड May 02, 2026 पर 12:07 PM
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विमान के कई उपकरण रेडियो वेव्स के जरिए दिशा और दूरी का पता लगाते हैं।

हवाई यात्रा के दौरान जैसे ही फ्लाइट टेक-ऑफ के लिए तैयार होती है, यात्रियों को अपने फोन को एयरप्लेन मोड पर डालने या बंद करने का निर्देश दिया जाता है। ये एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसके पीछे का कारण कई लोगों को समझ नहीं आता। अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि आखिर एक छोटा-सा मोबाइल फोन इतने बड़े विमान को कैसे प्रभावित कर सकता है। कुछ लोग इसे महज औपचारिक नियम मानकर नजरअंदाज भी कर देते हैं, जबकि इसके पीछे सुरक्षा से जुड़ी अहम वजहें होती हैं।

दरअसल, ये नियम सिर्फ अनुशासन बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि फ्लाइट के सुरक्षित संचालन से जुड़ा है। अगर इसे सही तरीके से समझा जाए, तो यह साफ हो जाता है कि छोटी-सी सावधानी भी यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने में बड़ी भूमिका निभाती है।

रेडियो सिग्नल का खेल समझिए


विमान का पूरा सिस्टम रेडियो कम्युनिकेशन और नेविगेशन पर निर्भर करता है। पायलट लगातार एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क में रहते हैं। ऐसे में जब फोन सामान्य मोड पर होता है, तो वह लगातार नेटवर्क से जुड़ने के लिए सिग्नल भेजता रहता है, जिससे इंटरफेरेंस पैदा हो सकता है।

पायलट को क्यों होती है परेशानी?

आपका फोन विमान को गिरा नहीं सकता, लेकिन इससे पायलट को दिक्कत जरूर हो सकती है। कई फोन एक साथ ऑन रहने पर उनके सिग्नल पायलट के हेडफोन में अजीब आवाज या गूंज पैदा करते हैं, जिससे जरूरी बातचीत प्रभावित हो सकती है।

नेविगेशन सिस्टम पर भी असर

विमान के कई उपकरण रेडियो वेव्स के जरिए दिशा और दूरी का पता लगाते हैं। हालांकि आधुनिक सिस्टम सुरक्षित होते हैं, लेकिन अतिरिक्त सिग्नल से हल्का-फुल्का व्यवधान आ सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाता।

एयरप्लेन मोड क्या करता है?

जब आप फोन को एयरप्लेन मोड पर डालते हैं, तो उसके सभी वायरलेस सिग्नल बंद हो जाते हैं। इससे कॉल, मैसेज और नेटवर्क कनेक्शन रुक जाता है, और विमान के सिस्टम पर किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं होता।

सुरक्षा के लिए जरूरी नियम

भले ही खतरा बड़ा न हो, लेकिन सुरक्षा में छोटी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। इसलिए एयरप्लेन मोड का नियम सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि यात्रियों और विमान की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानी है।

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