आज के समय में ज्यादातर लोग मानते हैं कि जितने ज्यादा घंटे काम करेंगे, उतनी ही सफलता मिलेगी। कई ऑफिसों में देर तक रुकना और हमेशा व्यस्त दिखना मेहनती कर्मचारी की पहचान माना जाता है। लेकिन क्या सच में अच्छी नौकरी का मतलब सिर्फ लंबे समय तक काम करना है? क्या कम समय में भी बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है? इन सवालों पर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। एक वायरल पोस्ट ने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा है कि काम की असली पहचान घंटों से नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और फोकस से होती है।
यही वजह है कि अब लोग वर्क-लाइफ बैलेंस, स्मार्ट वर्क और सही टाइम मैनेजमेंट को पहले से ज्यादा अहम मानने लगे हैं। इस पोस्ट ने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि शायद कम समय में पूरे मन से किया गया काम, लंबे समय तक बिना फोकस के काम करने से कहीं ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है।
7 घंटे काम, लेकिन शानदार प्रदर्शन
अमेरिका में काम कर रहीं भारतीय प्रोफेशनल मुस्कान अग्रवाल ने लिंक्डइन पर अपने Amazon के एक पूर्व सहकर्मी का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी टीम का एक सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर (SDE 3) रोज सुबह ठीक 8 बजे ऑफिस पहुंचता था और दोपहर 3 बजे तक अपना काम खत्म कर निकल जाता था।
ऑफिस के बाद पूरी तरह ऑफलाइन
सबसे दिलचस्प बात यह थी कि वह कर्मचारी ऑफिस छोड़ने के बाद कभी भी Slack या किसी ऑफिस चैट पर दिखाई नहीं देता था। न देर रात काम करता था और न ही वीकेंड पर अतिरिक्त घंटों की होड़ में शामिल होता था।
फोकस ने बनाया सबसे प्रोडक्टिव कर्मचारी
मुस्कान के मुताबिक, सीमित समय में पूरी एकाग्रता के साथ काम करने की वजह से वह टीम का सबसे खुश और सबसे अधिक प्रोडक्टिव सदस्य था। उसके काम की गुणवत्ता भी शानदार थी और वह बिना अनावश्यक ओवरटाइम के अपने सभी लक्ष्य पूरे कर लेता था।
सोशल मीडिया पर शुरू हुई नई बहस
यह पोस्ट वायरल होने के बाद इंटरनेट पर नई चर्चा छिड़ गई है। कई लोगों का मानना है कि सफलता का राज लंबे घंटों तक काम करने में नहीं, बल्कि काम के दौरान पूरी एकाग्रता और बेहतर टाइम मैनेजमेंट में छिपा है। वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि हर नौकरी और हर टीम में ऐसा वर्क रूटीन अपनाना संभव नहीं होता।