मैगी का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में तुरंत बनने वाला एक आसान और पसंदीदा स्नैक आता है। लेकिन अमृतसर में इसी आम मैगी को कुछ लोगों ने इतने बड़े स्तर पर तैयार किया कि देखने वाले भी हैरान रह गए। यहां 1000 पैकेट वेजिटेबल मैगी एक साथ बनाई गई और फिर इसे लोगों के बीच बांटा गया। बड़े बर्तन में पकती मैगी और उसे लेने के लिए जुटे लोगों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया। इस आयोजन ने सिर्फ अपनी विशाल मात्रा की वजह से ध्यान नहीं खींचा, बल्कि लोगों के बीच इस बात पर भी बहस शुरू हो गई कि लंगर में किस तरह का भोजन परोसा जाना चाहिए।
कुछ लोगों ने इसे मिल-बांटकर खाना खिलाने की अच्छी पहल माना, जबकि कुछ ने मैगी की जगह पौष्टिक भोजन को बेहतर विकल्प बताया। यानी एक साधारण सी मैगी ने खाने से आगे बढ़कर परंपरा और पसंद पर चर्चा छेड़ दी।
बड़े भगोने में शुरू हुई हजार पैकेट की तैयारी
वीडियो की शुरुआत मैगी के ढेर सारे पैकेट खोलने से होती है। इसके बाद एक बड़े बर्तन को चूल्हे पर रखा गया और उसमें तेल व मक्खन डाला गया। फिर बारी-बारी से प्याज, शिमला मिर्च, गाजर, मटर, स्वीट कॉर्न, मशरूम और टमाटर जैसी कई सब्जियां डाली गईं। इतनी मात्रा में सामग्री देखकर ही अंदाजा लग जाता है कि खाना कितने लोगों के लिए तैयार किया जा रहा था।
मैगी में डाली गईं ढेर सारी सब्जियां और पनीर
सब्जियों को अच्छी तरह पकाने के बाद बड़े बर्तन में पानी और मैगी मसाला डाला गया। इसके बाद 1000 पैकेट की मैगी उसमें शामिल कर दी गई। जब मैगी पककर तैयार हुई तो इसमें पनीर के कई किलो टुकड़े भी डाले गए। आखिर में तैयार खाना लोगों को गर्मागर्म परोसा गया।
खाना लेने के लिए जुटे लोग
मैगी तैयार होने के बाद वितरण शुरू हुआ तो लोगों की कतार लग गई। रोजाना घरों और छोटी दुकानों में नजर आने वाली मैगी का इतना बड़ा रूप देखकर वहां मौजूद लोगों के लिए यह अनुभव खास रहा।
वीडियो में कई लोग खाना लेते दिखाई दे रहे हैं। आयोजन का सबसे मानवीय पहलू यही था कि एक आम पसंद के खाने ने अलग-अलग लोगों को एक जगह ला दिया।
वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा तो प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं रहीं। कुछ लोगों ने इस प्रयास की सराहना की और कहा कि लोगों को खाना खिलाने की पहल अच्छी है। वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल किया कि लंगर जैसे सामुदायिक भोजन में मैगी को शामिल करना कितना उचित है। कुछ लोगों ने इसकी जगह दाल, सब्जी या दूसरे पौष्टिक भोजन को बेहतर विकल्प बताया।
क्या लंगर सिर्फ खाने का नाम है?
इस आयोजन ने एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा कर दिया क्या लंगर की पहचान सिर्फ इस बात से तय होनी चाहिए कि उसमें क्या खाना परोसा जा रहा है, या फिर लोगों को मिल-बांटकर भोजन कराना इसका बड़ा उद्देश्य है? सोशल मीडिया पर इसी बात को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिली। कुछ लोगों ने परंपरा पर जोर दिया, जबकि कुछ ने सेवा और लोगों को भोजन उपलब्ध कराने को ज्यादा महत्वपूर्ण माना।
एक साधारण मैगी ने शुरू कर दी बड़ी चर्चा
1000 पैकेट मैगी से तैयार यह आयोजन इसलिए चर्चा में आया क्योंकि इसमें एक बेहद आम चीज को बड़े सामुदायिक भोजन का रूप दिया गया। किसी के लिए यह लोगों को जोड़ने वाली अच्छी पहल थी, तो किसी के लिए लंगर की परंपरा और सेहत से जुड़ा सवाल।