कड़ाके की ठंड में आज हम कंबल, रजाई, ब्लोअर और हीटर के बिना रहना सोच भी नहीं सकते, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब इंसान के पास इन आधुनिक सुविधाओं का नाम-निशान तक नहीं था। न मोटी रजाइयां थीं, न ऊन के स्वेटर, न ही बिजली का हीटर फिर भी लोग बर्फ जैसी ठंडी रातें काट लेते थे। उस समय इंसान का सबसे बड़ा हथियार था उसकी समझदारी और प्रकृति का साथ। जंगल, गुफाएं, मिट्टी की झोपड़ियां, आग की गर्माहट और शरीर को बचाने के देसी तरीक़े इन सबके भरोसे इंसान ने सदियों तक सर्दियों से जंग जीती।
पुराने समय के लोग गर्म रहने के जो तरीके अपनाते थे, वे आज सुनने में बड़े रोचक लगते हैं। बिना किसी वैज्ञानिक मशीन या तकनीक के, सिर्फ दिमाग़ और जुगाड़ से कैसे वो ठिठुरती रातों में खुद को बचाए रखते थे। ये आपको हैरान कर देगा। आइए उसी अद्भुत सफर को जानें।
आग इंसान का सबसे पुराना और सबसे बड़ा हथियार थी। गुफाओं और मिट्टी-झोपड़ियों में लोग आग जलाकर गर्मी लेते थे। ये ठंडी हवाओं को रोकती थी और शरीर को पूरी रात गर्म बनाए रखती थी।
2. जानवरों की खाल से बनी गर्माहट
कपड़े बनने से पहले आदिमानव जानवरों की खाल का इस्तेमाल करते थे। भालू, भेड़िए, हिरन जैसे जानवरों की मोटी फर वाली खाल ठंडी हवा को रोकती थी और शरीर को प्राकृतिक गर्मी देती थी।
3. गुफाएं और मोटी दीवारों वाले घर
वास्तुकला भी ठंड से बचने का बड़ा तरीका थी। गुफाएं नमी और हवाओं से सुरक्षा देती थीं। बाद में लोग मिट्टी, पत्थर और लकड़ी से मोटी दीवारों वाले घर बनाने लगे, जो दिन की गर्मी सोखकर रात में धीरे-धीरे छोड़ते थे।
लोग सोने की जगह के पास गरम किए हुए पत्थर रख देते थे, जो पूरी रात कमरे में गर्मी फैलाते थे। यूरोप में फर्श पर पुआल बिछाने की परंपरा थी—यह जमीन की ठंडक को कम कर देता था। मिट्टी के चूल्हे भी कमरों को गर्म रखने में मदद करते थे।
ऊनी, चमड़े और सूती कपड़े लोगों को सर्दी से बचाते थे। एक के ऊपर एक कई कपड़े पहनने से शरीर में गर्मी लंबे समय तक बनी रहती थी।
6. एक-दूसरे के पास सोकर गर्मी साझा करना
पुराने समय में लोग एक साथ सटकर सोते थे। शरीर की गर्मी साझा होने से तापमान बढ़ता था और ठंडी रातें आसानी से कट जाती थीं।