August 2026 eclipse: अगस्त में 15 दिनों के अंतर पर लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं, तारीख और सूतक काल

August 2026 eclipse: अगस्त का महीना खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है। इस माह में 15 दिनों के अंतर पर दो ग्रहण लगेंगे। एक सूर्य ग्रहण और एक चंद्र ग्रहण होगा। आइए जानें इनमें कौन सा ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इनकी तारीख और सूतक काल का समय क्या होगा

अपडेटेड Jul 08, 2026 पर 1:48 PM
ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के एक सीधी रेखा में आ जाने पर लगता है।

August 2026 eclipse: इस साल का अगला महीना अगस्त का होगा, जो दो बड़ी खगोल घटनाओं का गवाह बनेगा। इस माह में साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के एक सीधी रेखा में आ जाने पर लगता है। लेकिन यह धार्मिक और ज्योतिष रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। साल के अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण 15 दिनों के अंतराल पर लगेंगे। यह खगोलीय घटना सावन के महीने लगने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

सूर्य ग्रहण जहां 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा, वहीं चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर रक्षा बंधन के दिन लगेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूतक काल लग जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। सूतक काल खत्म होने के बाद ही दोबारा मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ आदि धार्मिक कार्य शुरू होते हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है और विशेषज्ञ ग्रहण के प्रभावों का अध्ययन करते हैं।

अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त सावन अमावस्या के मौके पर लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा।

अगस्त 2026 में दूसरा चंद्र ग्रहण

अगस्त 2026 में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण, श्रावण मास की पूर्णिमा पर 28 अगस्त 2026 को लगेगा। इस दिन भारत में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। इस वजह से इस दिन रक्षाबंधन का त्योहार अप्रभावित रहेगा।


सूतक काल के नियम

सावन के माह में लगने वाले साल के अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएंगे और इनका सूतक भी नहीं रहेगा। इसलिए इन दोंनों दिनों के पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई प्रभाव नहीं होगा। हालांकि इसके ज्योतिषीय प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

ग्रहण काल में अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?

  • सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • ग्रहण काल के बाद पूजा-पाठ और इच्छा के अनुसार दान करना चाहिए।
  • ग्रहण काल के बाद नहाना चाहिए और शिवलिंग पर जला अर्पित करना चाहिए।

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