ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को अधिकारी “सदी का अंतिम संस्कार” बता रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस ऐतिहासिक आयोजन में करीब 1.2 करोड़ से लेकर 2 करोड़ (20 मिलियन) लोगों के शामिल होने की संभावना है, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक शोक समारोह बन गया है। राजधानी तेहरान से शुरू हुए इस छह दिवसीय कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ रही है और कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इसी बीच यह भी सामने आया है कि खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार समारोह में शामिल नहीं होंगे, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
अभूतपूर्व तैयारियां और कड़ी सुरक्षा
इस बार की तैयारियां किसी भी सरकारी कार्यक्रम से कहीं ज्यादा बड़ी बताई जा रही हैं। पूरे आयोजन की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की प्रमुख इकाई “मोहम्मद रसुलोल्लाह कोर” संभाल रही है। तेहरान से लेकर अन्य शहरों तक सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
तेहरान में होने वाला यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मंच भी बन गया है। दर्जनों देशों से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और संसद अध्यक्ष जैसे नेता शामिल हो रहे हैं। करीब 800 विदेशी पत्रकार इस पूरे कार्यक्रम की कवरेज कर रहे हैं, जिससे इसकी वैश्विक अहमियत और बढ़ गई है।
भीड़ प्रबंधन और दर्शन की व्यवस्था
अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। खामेनेई का पार्थिव शरीर ऊंचे मंच पर रखा गया है, जहां लोग 15-20 मिनट के भीतर दर्शन कर बाहर निकल रहे हैं। जमकारान मस्जिद जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जनाजे की नमाज और अन्य रस्में भी आयोजित की जा रही हैं।
छह दिनों का पूरा कार्यक्रम
अंतिम संस्कार कई शहरों में चरणबद्ध तरीके से हो रहा है:
इसके बाद पूरे देश में 40 दिनों तक शोक और श्रद्धांजलि कार्यक्रम चलेंगे।
आयोजन का नारा “We Must Rise” रखा गया है, जिसे मुट्ठी भींचे हाथ के प्रतीक के साथ जोड़ा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ अंतिम विदाई नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक ताकत और शिया दुनिया में उसके प्रभाव का प्रदर्शन भी है।
वैश्विक शोक और ऐतिहासिक भीड़
तेहरान की सड़कें लाखों लोगों से भर चुकी हैं। काले कपड़ों में उमड़ी भीड़, ट्रैफिक जाम और सुरक्षा घेराबंदी ने पूरे शहर को शोक के विशाल मंच में बदल दिया है। यह आयोजन न सिर्फ ईरान बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटना बन चुका है।