Video: 50 लाख रुपये कमाने के बाद भी अमीर नहीं बन पाएंगे! बेंगलुरु के टेक प्रोफेशनल का दावा, वजह जानकर चौंक जाएंगे

बेंगलुरु में अच्छी खासी सैलरी पाने वाले टेक प्रोफेशनल्स के बीच कमाई और संपत्ति बनाने को लेकर नई बहस छिड़ गई है। एक टेक प्रोफेशनल के दावे ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है। उनका कहना है कि शहर में बड़ी सालाना आय होने के बावजूद आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य बनाना आसान नहीं है

अपडेटेड Aug 09, 2026 पर 10:15 AM
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई।

बेंगलुरु में मोटी सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स के लिए भी आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य बनाना कितना आसान है, इस पर सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है। एक टेक प्रोफेशनल ने शहर की महंगी जीवनशैली को लेकर ऐसा दावा किया है, जिसने इंटरनेट यूजर्स का ध्यान खींच लिया। उनका कहना है कि लाखों रुपये सालाना कमाने के बावजूद किसी व्यक्ति के लिए बड़ी संपत्ति खड़ी करना उतना आसान नहीं है, जितना बाहर से दिखाई देता है। बेंगलुरु को देश के प्रमुख आईटी हब के तौर पर जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में टेक प्रोफेशनल्स आकर्षक पैकेज पर काम करते हैं।

हालांकि, बढ़ती महंगाई और जीवनशैली से जुड़े खर्चों ने कमाई और बचत के बीच का अंतर बढ़ा दिया है। इसी मुद्दे को लेकर सामने आया यह दावा अब सोशल मीडिया पर चर्चा और अलग-अलग राय का कारण बन गया है।

₹3 लाख महीना हाथ में आए तो भी खर्च कम नहीं


इंस्टाग्राम पर टेक प्रोफेशनल अनमोल अग्रवाल ने एक वीडियो शेयर कर बेंगलुरु की हाई सैलरी और हाई कॉस्ट ऑफ लिविंग का गणित समझाया। उन्होंने उदाहरण के तौर पर ₹50 लाख सालाना बेस सैलरी मानकर बताया कि टैक्स और ईपीएफ जैसी कटौतियों के बाद करीब ₹35 लाख सालाना, यानी लगभग ₹3 लाख प्रति माह हाथ में बच सकते हैं।

लेकिन यहीं से खर्चों का सिलसिला शुरू होता है।

₹60-70 हजार सिर्फ किराए में! अग्रवाल के अनुमान के मुताबिक, बेंगलुरु में एक अच्छे 2BHK फ्लैट का किराया करीब ₹60,000 से ₹70,000 प्रति माह हो सकता है। इसके अलावा मेड, कुक, राशन, जिम और रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च भी जुड़ जाता है। शॉपिंग और यात्रा को शामिल करने के बाद उनका अनुमान है कि मासिक खर्च करीब ₹1.2 लाख से ₹1.3 लाख तक पहुंच सकता है।

कार खरीदी तो खर्च में और ₹50 हजार जुड़ेंगे

अगर कोई व्यक्ति कार भी खरीदता है, तो वित्तीय बोझ और बढ़ सकता है। अग्रवाल ने कार से जुड़े खर्च के लिए करीब ₹50,000 प्रति माह का अनुमान लगाया। उनका कहना है कि यह आंकड़ा भी उन्होंने अपेक्षाकृत कम रखा है। यानी ₹3 लाख मासिक आय में से बड़ी रकम जीवनशैली और जरूरी खर्चों में निकल सकती है।

बच्चों के बाद बचत और भी मुश्किल

अग्रवाल के अनुसार, अगर परिवार में बच्चे भी हों तो शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य खर्चों के कारण आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में उनके अनुमान के मुताबिक व्यक्ति के पास हर महीने करीब ₹1 लाख ही निवेश या संपत्ति बनाने के लिए बच सकता है।

असली चुनौती सिर्फ खर्च नहीं, घर की कीमत भी है

बेंगलुरु में संपत्ति की बढ़ती कीमतों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका दावा है कि आज करीब ₹3 करोड़ की कीमत वाली प्रॉपर्टी भविष्य में ₹6 करोड़ या ₹7 करोड़ तक पहुंच सकती है। ऐसे में अच्छी सैलरी और लगातार निवेश के बावजूद अपना घर खरीदना कई लोगों के लिए रिटायरमेंट के करीब तक भी मुश्किल बना रह सकता है।

नौकरी गई या AI का असर पड़ा तो पूरा गणित बदल जाएगा

अग्रवाल ने यह भी कहा कि उनका पूरा अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि व्यक्ति लगातार नौकरी करता रहे और उसे छंटनी या AI के कारण नौकरी पर पड़ने वाले असर जैसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। अगर नौकरी चली जाए या आय में बड़ा बदलाव आए, तो संपत्ति बनाने की पूरी योजना प्रभावित हो सकती है।

‘बेंगलुरु में रहकर अमीर बनना मुश्किल’, दिया ये सुझाव

अग्रवाल ने सुझाव दिया कि ज्यादा कमाई करने वाले प्रोफेशनल रिमोट नौकरी या अपना व्यवसाय शुरू करने पर विचार कर सकते हैं और कम खर्च वाले टियर-3 शहरों से काम कर सकते हैं। उनका तर्क है कि छोटे शहर में समान आय होने पर किराया और रोजमर्रा के खर्च कम होने के कारण निवेश के लिए ज्यादा रकम बचाई जा सकती है।

₹250-350 की कॉफी पर भी छिड़ी बहस

उन्होंने बेंगलुरु की महंगी जीवनशैली का उदाहरण देते हुए कहा कि शहर में एक कप कॉफी की कीमत भी कई जगहों पर ₹250, ₹300 या ₹350 तक पहुंच सकती है। उनके अनुसार, जब जीवन जीने की लागत इतनी ज्यादा हो, तो केवल बड़ी सैलरी हासिल कर लेना आर्थिक रूप से ‘वास्तव में अमीर’ बनने की गारंटी नहीं देता।

सोशल मीडिया पर लोगों ने भी रखी अपनी राय

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने महंगे महानगर से बाहर रहकर रिमोट काम करने को बेहतर विकल्प बताया। एक यूजर ने बताया कि वह कई सालों से जयपुर से रिमोट काम कर रहा है और कम ट्रैफिक, बेहतर हवा और कम खर्च के कारण खुद को ज्यादा खुश और मानसिक रूप से बेहतर महसूस करता है।

वहीं, एक अन्य यूजर ने इस दावे से असहमति जताते हुए कहा कि गुरुग्राम में रहने के बावजूद उसे ऐसी आर्थिक परेशानी नहीं लगती। यानी सोशल मीडिया पर बहस का सवाल यही है क्या बड़ी सैलरी ही काफी है, या असली संपत्ति इस बात पर निर्भर करती है कि आप कहां और कैसे रहते हैं?

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