एक महीने में भेजे 500 रिज्यूमे, नहीं आया एक भी कॉल, फ्रेशर्स की मुश्किलें आईं सामने

बेंगलुरु के एक बीटेक ग्रेजुएट ने नौकरी की तलाश में एक महीने में 500 से ज्यादा आवेदन किए, लेकिन उसे एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं मिला। लिंक्डइन और जॉब पोर्टल्स पर लगातार कोशिश के बाद भी निराशा हाथ लगी। उसकी कहानी ने फ्रेशर्स के मुश्किल होते जॉब मार्केट पर बहस छेड़ दी है

अपडेटेड Jul 11, 2026 पर 12:24 PM
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इस टेक प्रोफेशनल ने अपनी आर्थिक सफलता का श्रेय कम खर्च वाली जीवनशैली, शुरुआती रियल एस्टेट निवेश को दिया।

भारत में इंजीनियरिंग करने के बाद अच्छी नौकरी पाना आज कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी परेशानी को दिखाती है बेंगलुरु के एक बीटेक ग्रेजुएट की कहानी, जिसने नौकरी की तलाश में एक महीने के भीतर 500 से ज्यादा आवेदन भेजे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसे एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं मिला। इस युवा इंजीनियर ने लिंक्डइन, अलग-अलग जॉब पोर्टल और कंपनियों की करियर वेबसाइटों पर लगातार प्रयास किया, लेकिन हर जगह से निराशा हाथ लगी।

उसका कहना है कि वो किसी बड़ी सैलरी या नामी कंपनी की तलाश में नहीं है, बल्कि सिर्फ एक ऐसा मौका चाहता है जहां वह काम सीख सके और अपने करियर की शुरुआत कर सके। उसकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हजारों फ्रेशर्स की परेशानियों को उजागर कर दिया है।

बड़ी सैलरी नहीं, बस शुरुआत का एक मौका चाहिए


युवा इंजीनियर ने कहा कि उसका लक्ष्य किसी बड़ी कंपनी में भारी पैकेज हासिल करना नहीं है। वह सिर्फ ऐसा अवसर चाहता है जहां वह काम सीख सके, इंडस्ट्री का अनुभव हासिल कर सके और अपने करियर की मजबूत शुरुआत कर सके।

उसने लिखा कि वह किसी भी अच्छे टेक रोल, यहां तक कि शुरुआती दौर के स्टार्टअप में भी काम करने के लिए तैयार है, जहां उसे सीखने और योगदान देने का मौका मिले।

जब ऑनलाइन आवेदन भी बेअसर हुए तो रेडिट से मांगी मदद

लगातार कोशिशों के बाद जब कोई रास्ता नजर नहीं आया, तो इंजीनियर ने रेडिट पर अपनी परेशानी साझा की। उसने नौकरी देने वालों, स्टार्टअप फाउंडर्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से मदद की अपील की।

उसकी पोस्ट का शीर्षक था  “एक महीने में 500+ नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन एक भी इंटरव्यू नहीं मिला।”

पोस्ट वायरल होते ही कई फ्रेशर्स ने अपनी-अपनी परेशानियां साझा करनी शुरू कर दीं।

फ्रेशर्स की सबसे बड़ी चुनौती

कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करना काफी नहीं रह गया है। एक यूजर ने सलाह दी कि उम्मीदवारों को सीधे कंपनी के फाउंडर्स, एचआर या कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश करनी चाहिए।

हालांकि, कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने भी ऐसा करके देखा, लेकिन 100 से ज्यादा एचआर को मैसेज करने के बाद भी उन्हें इंटरव्यू का मौका नहीं मिला।

स्किल्स हैं, फिर भी दरवाजे बंद हैं

एक कमेंट में एक टेक उम्मीदवार ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसके पास इंटर्नशिप अनुभव और कई आधुनिक टेक्नोलॉजी की जानकारी होने के बावजूद नौकरी पाना मुश्किल हो रहा है। उसने बताया कि वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एजेंट ऑर्केस्ट्रेशन, ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर, लैंगचेन और लैंगग्राफ जैसी तकनीकों पर काम कर चुका है, फिर भी कंपनियों तक पहुंच बनाना चुनौती बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा जॉब मार्केट में फ्रेशर्स के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद बढ़ गई है, जबकि कुछ ने उम्मीदवारों को नेटवर्किंग और सीधे संपर्क जैसे तरीकों पर ध्यान देने की सलाह दी।

वहीं कुछ लोगों ने उम्मीद भी दिखाई। एक यूजर ने बताया कि उसे एक जॉब प्लेटफॉर्म के जरिए इंटरव्यू मिला और पूरी प्रक्रिया में करीब एक महीना लगा।

नौकरी बाजार की नई हकीकत

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिर्फ डिग्री और तकनीकी ज्ञान आज के जॉब मार्केट में पर्याप्त हैं? बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन कंपनियां अनुभव, प्रोजेक्ट्स और नेटवर्किंग को भी तेजी से महत्व दे रही हैं।

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