3.5 लाख सैलरी पर 50 हजार की सेविंग भी मुश्किल! इस शख्स का बजट और खर्च देखकर आपको हैरानी होगी

बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल की पोस्ट वायरल हो गई है, जिसमें उन्होंने बताया कि अच्छी सैलरी के बावजूद वे बहुत कम बचत कर पा रहे हैं। बढ़ते खर्च और जिम्मेदारियों के कारण वे आर्थिक तनाव में हैं। यह मामला दिखाता है कि सिर्फ ज्यादा कमाई ही सब कुछ नहीं होती

अपडेटेड Jun 22, 2026 पर 3:54 PM
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टेक कर्मचारी ने बताया कि उनका कुल CTC करीब ₹96 लाख सालाना है।

बेंगलुरु के एक 34 साल के टेक प्रोफेशनल की पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है, जिसमें उन्होंने अपनी फाइनेंशियल स्थिति को लेकर खुलकर बात की है। बाहर से देखने पर उनकी इनकम काफी मजबूत लगती है, लेकिन असलियत इससे अलग है। उन्होंने बताया कि अच्छी सैलरी होने के बावजूद बढ़ते खर्चों की वजह से वो हर महीने बहुत कम सेविंग कर पा रहे हैं। घर का लोन, कार लोन, बच्चों की देखभाल, डेकेयर, घरेलू खर्च और अन्य जिम्मेदारियां मिलकर उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खत्म कर देती हैं। इस वजह से उन्हें भविष्य को लेकर लगातार चिंता और तनाव महसूस होता है।

उनका कहना है कि कई बार वे थकान और मानसिक दबाव के कारण ब्रेक लेना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक जिम्मेदारियां उन्हें रोक देती हैं। ये मामला दिखाता है कि केवल ज्यादा कमाई ही नहीं, बल्कि सही वित्तीय प्लानिंग भी उतनी ही जरूरी होती है।

हाई सैलरी, लेकिन असली चिंता


टेक कर्मचारी ने बताया कि उनका कुल CTC करीब 96 लाख रुपेय सालाना का है। इसमें लगभग ₹3.5 लाख प्रति माह टैक्स कटने के बाद मिलते हैं, जबकि बाकी हिस्सा ESOPs में है, जिसे वह फिलहाल भरोसेमंद नहीं मानते। उनका कहना है कि भारी खर्चों के कारण महीने के अंत में बचत बेहद कम रह जाती है।

EMI से लेकर नर्सरी तक भारी बोझ

अपनी पोस्ट में उन्होंने महीने के खर्चों का पूरा हिसाब भी दिया।

  • ₹80,000 होम लोन EMI
  • ₹30,000 कार लोन
  • ₹40,000 नानी का खर्च
  • ₹50,000 बच्चों की प्रीस्कूल और डेकेयर फीस
  • ₹20,000 ग्रोसरी
  • ₹40,000 ट्रैवल और फैमिली विजिट्स
  • बाकी छोटे-मोटे घरेलू खर्च, जिम और यूटिलिटी बिल

इन सबको जोड़ने के बाद सेविंग्स बहुत कम बचती हैं, जिससे वित्तीय दबाव और बढ़ जाता है।

“3 करोड़ की नेट वर्थ, फिर भी चिंता क्यों?”

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि उनकी कुल नेट वर्थ करीब 3 करोड़ रुपेय की है, लेकिन पिछले कुछ सालों में इसमें बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। वह हर साल लगभग 4–5 लाख रुपेय  ही जोड़ पा रहे हैं। उन्हें सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि अगर नौकरी चली गई तो पूरा बजट बिगड़ सकता है।

मानसिक दबाव और बर्नआउट का दर्द

पोस्ट में उन्होंने यह भी बताया कि लगातार बढ़ते खर्चों और जिम्मेदारियों के कारण वह मानसिक तनाव और बर्नआउट महसूस कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि थोड़ा ब्रेक लें, लेकिन आर्थिक दबाव इसकी इजाजत नहीं देता।

सोशल मीडिया की राय

इस पोस्ट पर यूजर्स ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी।

कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि परिवार की मदद ली जा सकती है, जिससे खर्चों में राहत मिलेगी और बच्चों की देखभाल भी बेहतर हो सकती है।

वहीं कुछ यूजर्स ने कहा कि फोकस सिर्फ सेविंग्स पर नहीं, बल्कि इन्वेस्टमेंट ग्रोथ पर होना चाहिए।

कुछ लोगों का यह भी कहना था कि असल में उनकी सेविंग्स और एसेट्स काफी हैं, बस खर्चों और जिम्मेदारियों का बोझ उन्हें मानसिक रूप से दबा रहा है।

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