सड़क किनारे खाया एक स्नैक और बदल गई इन दो दोस्तों की जिंदगी, आज बना दिया करोड़ों का ब्रांड!

बिहार के दो युवाओं, जयंत और कैलाश की दोस्ती ने एक छोटे से अनुभव से बड़ा बिजनेस आइडिया जन्म दिया। सड़क किनारे खराब स्नैक खाने के बाद जयंत को हुई परेशानी ने दोनों को सोचने पर मजबूर किया कि पारंपरिक भारतीय स्वाद को साफ-सुथरे और भरोसेमंद तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए

अपडेटेड Jun 20, 2026 पर 4:42 PM
जो सफर एक छोटे से किचन से शुरू हुआ था, वह आज पूरे देश में पहुंच चुका है।

बिहार के दो युवाओं, जयंत और कैलाश की दोस्ती ने एक ऐसी कहानी को जन्म दिया, जो आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। ये सफर किसी बड़े निवेश या बिजनेस प्लान से नहीं, बल्कि एक छोटे लेकिन खराब अनुभव से शुरू हुआ। सड़क किनारे एक ठेले से खाया गया स्नैक जयंत के लिए परेशानी का कारण बन गया, लेकिन उसी पल ने उनके सोचने का तरीका बदल दिया। उन्हें एहसास हुआ कि भारत के पारंपरिक स्नैक्स स्वाद और भावनाओं से भरे होते हैं, लेकिन अक्सर उनकी स्वच्छता और गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं।

यही विचार धीरे-धीरे एक बड़े आइडिया में बदल गया। दोनों दोस्तों ने मिलकर तय किया कि वे ऐसे स्नैक्स बनाएंगे जो न सिर्फ स्वादिष्ट हों, बल्कि साफ-सुथरे और भरोसेमंद भी हों, ताकि लोग बिना किसी चिंता के भारतीय स्वाद का आनंद ले सकें।

“शुद्ध स्वाद” का सपना कैसे शुरू हुआ


इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए दोनों दोस्तों ने मिलकर “Shuddh Swad” की नींव रखी। उनका मकसद था। भारतीय पारंपरिक स्नैक्स को न सिर्फ स्वादिष्ट बनाना, बल्कि उन्हें स्वच्छ, सुरक्षित और सालभर उपलब्ध कराना, ताकि लोग त्योहारों तक सीमित न रहें।

दोस्ती से साझेदारी तक का सफर

जब जयंत ने अपना आइडिया अपने दोस्त कैलाश से साझा किया, तो वो तुरंत इससे जुड़ गया। कैलाश, जो आर्थिक परिस्थितियों के चलते पढ़ाई छोड़कर रेलवे स्टेशनों पर पानी की बोतलें बेचता था, ने इसे सिर्फ कमाई का जरिया नहीं बल्कि कुछ बड़ा करने का मौका माना।

घर की रसोई से शुरू हुआ संघर्ष

दोनों ने मिलकर अपने घर से ही प्रयोग शुरू किए। रोज लगभग 10 घंटे मेहनत कर वो ठेकुआ, मखाना, केले के चिप्स और बेसन के लड्डू जैसे पारंपरिक स्नैक्स को नया और साफ-सुथरा रूप देने में जुट गए। उनका लक्ष्य था, कम कीमत में असली भारतीय स्वाद को बनाए रखना।

शुरुआती असफलता और धैर्य की परीक्षा

शुरुआत आसान नहीं थी। पहले दो महीनों तक एक भी ऑर्डर नहीं मिला। लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार अपने प्रोडक्ट्स में सुधार किया और सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम के जरिए अपनी कहानी लोगों तक पहुंचाई।

सोशल मीडिया बना टर्निंग पॉइंट

धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीतने के बाद ऑर्डर आने लगे। स्थानीय समुदायों और पारंपरिक स्वाद पसंद करने वाले ग्राहकों ने उनके ब्रांड को अपनाना शुरू किया, और यहीं से सफर ने रफ्तार पकड़ ली।

आज करोड़ों की पहचान

जो सफर एक छोटे से किचन से शुरू हुआ था, वह आज पूरे देश में पहुंच चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, “Shuddh Swad” ने एक साल में ₹1 करोड़ का टर्नओवर हासिल किया और 2025 तक 3 लाख से ज्यादा ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना ली है।

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