बिहार के पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर इलाके में एक खौफनाक नजारा देखने को मिला, जब एक घर में अचानक विशालकाय किंग कोबरा पहुंच गया। करीब 10 फीट लंबे इस जहरीले सांप को देखते ही परिवार में दहशत फैल गई। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और लोग मौके पर जुटने लगे। मुन्नी लाल के घर में घुसे इस खतरनाक मेहमान ने कुछ देर के लिए पूरे इलाके में सनसनी पैदा कर दी।
हालांकि, समय रहते रेस्क्यू टीम को सूचना दी गई और स्थिति को संभाल लिया गया। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों को वन्यजीवों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।
‘स्नेक लेडी’ ने खतरनाक सांप का किया रेस्क्यू
किंग कोबरा की सूचना मिलते ही वाल्मीकिनगर की मशहूर स्नेक रेस्क्यूअर जानकी देवी मौके पर पहुंचीं। इलाके में ‘स्नेक लेडी’ के नाम से पहचानी जाने वाली जानकी देवी ने बिना घबराए पूरी सावधानी और अनुभव के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने करीब 10 फीट लंबे किंग कोबरा को सुरक्षित पकड़ लिया। इसके बाद सांप को उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया गया। समय रहते हुए किए गए इस रेस्क्यू से परिवार और गांव के लोगों की जान बच गई।
बरसात में क्यों गांवों की ओर आते हैं जहरीले सांप?
वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव और बारिश के दिनों में सांप अक्सर अपने पुराने ठिकानों से निकलकर सुरक्षित जगह की तलाश करते हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में बसे गांवों में ऐसे मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि अगर घर या आसपास कोई जहरीला सांप नजर आए तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। तुरंत वन विभाग या किसी प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को इसकी जानकारी दें।
दुनिया के सबसे खतरनाक सांप
किंग कोबरा दुनिया के सबसे खतरनाक और जहरीले सांपों में शामिल है। इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो शरीर के तंत्रिका तंत्र पर तेजी से असर डाल सकता है। इसके काटने की स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेना बेहद जरूरी होता है।
12 साल की उम्र से शुरू किया था सांपों को बचाने का मिशन
जानकी देवी की पहचान सिर्फ एक रेस्क्यूअर के तौर पर नहीं, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए समर्पित योद्धा के रूप में भी है। उन्होंने महज 12 साल की उम्र से सांपों को बचाने का काम शुरू किया था। अब तक वह हजारों जहरीले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर चुकी हैं।
रेस्क्यू के दौरान कई बार खुद सांप के काटने का सामना करने के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ। आज वह इंसानों और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित संतुलन बनाने की मुहिम में लगातार जुटी हुई हैं।
सांप दुश्मन नहीं, प्रकृति का हिस्सा हैं
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि सही जानकारी और प्रशिक्षित लोगों की मदद से इंसान और खतरनाक वन्यजीवों के बीच टकराव को टाला जा सकता है। डर के बजाय सतर्कता और समझदारी ही ऐसे हालात में सबसे बड़ा हथियार है।