क्या खुले पानी में इस्तेमाल होती है श्मशान वाली बर्फ? जानिए पूरा सच
आइस फैक्ट्रियों में बर्फ तैयार करने के लिए कई आधुनिक मशीनों और कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें रेफ्रिजरेशन यूनिट, पाइप नेटवर्क, कूलिंग टैंक और स्क्रैपर जैसी तकनीकें शामिल होती हैं। कई प्लांट्स में बड़ी-बड़ी बर्फ की सिल्ली बनाई जाती है, जिन्हें बाद में अलग-अलग जरूरतों और जगहों के अनुसार सप्लाई किया जाता है
रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर बिकने वाला पानी अक्सर बड़े कंटेनरों में रखा जाता है।
गर्मी के मौसम में ठंडा पानी लोगों की सबसे बड़ी राहत बन जाता है। सफर के दौरान रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या बाजार में लोग अक्सर बर्फ वाला पानी पीकर गर्मी से बचने की कोशिश करते हैं। लेकिन हर साल इसी समय एक डरावनी अफवाह भी तेजी से फैलने लगती है। सोशल मीडिया से लेकर लोगों की बातचीत तक में यह दावा सुनने को मिलता है कि बाहर बिकने वाले ठंडे पानी में “श्मशान वाली बर्फ” इस्तेमाल की जाती है।
यह बात सुनकर कई लोग घबरा जाते हैं और खुले पानी को लेकर डरने लगते हैं। हालांकि कुछ लोग इसे सिर्फ अफवाह मानते हैं। सच क्या है और इस चर्चा की शुरुआत आखिर कैसे हुई, यह जानना काफी दिलचस्प है। साथ ही यह समझना भी जरूरी है कि बाहर का खुला पानी पीते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
आखिर इतनी बड़ी मात्रा में बर्फ बनती कैसे है?
गर्मियों में बर्फ की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में आइस फैक्ट्रियां दिन-रात बर्फ तैयार करती हैं। इसके लिए बड़े रेफ्रिजरेशन सिस्टम, कूलिंग टैंक, पाइप नेटवर्क और भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है।
कुछ फैक्ट्रियों में बड़ी-बड़ी बर्फ की सिल्ली तैयार की जाती है, जबकि कई जगह फ्लेक आइस और चिप आइस बनाई जाती है। पानी से भरे कंटेनरों को बेहद ठंडे नमक वाले घोल में रखा जाता है, जिससे कुछ घंटों में मोटी बर्फ तैयार हो जाती है। यही बर्फ बाद में अलग-अलग जगह सप्लाई की जाती है।
श्मशान वाली बर्फ की चर्चा शुरू कैसे हुई?
असल में कई जगह अंतिम संस्कार के दौरान शवों को सुरक्षित रखने के लिए भी बड़ी बर्फ की सिल्ली इस्तेमाल की जाती है। बस यहीं से लोगों के मन में यह धारणा बनने लगी कि जो बर्फ पानी या खाने-पीने की चीजों में इस्तेमाल होती है, वही श्मशान में भी जाती होगी।
धीरे-धीरे यह बात अफवाह में बदल गई और लोगों ने मान लिया कि सड़क किनारे बिकने वाले पानी में “श्मशान वाली बर्फ” डाली जाती है।
क्या खाने वाली और दूसरी बर्फ अलग होती है?
बर्फ बनाने वाली फैक्ट्रियां अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से बर्फ तैयार करती हैं। खाने-पीने में इस्तेमाल होने वाली बर्फ के लिए साफ पानी और स्वच्छ प्रक्रिया जरूरी मानी जाती है। वहीं कुछ बर्फ सिर्फ ठंडक बनाए रखने या औद्योगिक कामों के लिए बनाई जाती है।
इसी वजह से लाइसेंसधारी आइस प्लांट्स खाने योग्य बर्फ तैयार करने के लिए अलग मानकों का पालन करते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर बिना साफ-सफाई और जांच के भी बर्फ तैयार की जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
क्या इस अफवाह का कोई सबूत मिला है?
अब तक ऐसा कोई ठोस मामला सामने नहीं आया है, जिसमें यह साबित हुआ हो कि खुले पानी बेचने वाले लोग श्मशान में इस्तेमाल हुई बर्फ का उपयोग करते हैं। ज्यादातर विशेषज्ञ इसे अफवाह ही मानते हैं।
हालांकि असली चिंता “श्मशान वाली बर्फ” नहीं, बल्कि गंदी और असुरक्षित बर्फ है। अगर पानी में इस्तेमाल की जाने वाली बर्फ साफ न हो, तो उससे बैक्टीरिया और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
खुले पानी से क्यों रहना चाहिए सावधान?
रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर बिकने वाला पानी अक्सर बड़े कंटेनरों में रखा जाता है। उसे ठंडा रखने के लिए जिस बर्फ का इस्तेमाल होता है, उसकी गुणवत्ता के बारे में लोगों को जानकारी नहीं होती।
अगर बर्फ साफ पानी से न बनी हो, तो वह स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है। इससे पेट संक्रमण, उल्टी-दस्त और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
डर नहीं, सतर्कता है जरूरी
“श्मशान वाली बर्फ” वाली कहानी भले ही अफवाह हो, लेकिन गर्मियों में बाहर का खुला पानी पीते समय सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। कोशिश करें कि सीलबंद बोतल या भरोसेमंद जगह का पानी ही इस्तेमाल करें। क्योंकि कई बार बीमारी की वजह अफवाह नहीं, बल्कि गंदगी और लापरवाही होती है।