गाड़ी की स्टीयरिंग पकड़ते ही आने लगती है नींद? खिड़की खोलने और गाने बजाने से नहीं चलेगा काम, ये 60 मिनट थ्योरी जानिए

ड्राइविंग के दौरान अचानक आने वाली नींद और थकान को लोग अक्सर हल्के में ले लेते हैं। कई लोग खिड़की खोलकर या तेज गाने बजाकर खुद को अलर्ट रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन साइंस के मुताबिक ये तरीके ज्यादा असरदार नहीं होते। विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोस्लीप जैसी स्थिति सड़क पर बड़े हादसों की वजह बन सकती है

अपडेटेड May 28, 2026 पर 1:59 PM
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अक्सर लोग सोचते हैं कि वे 3-4 घंटे लगातार बिना थके गाड़ी चला सकते हैं

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि कार या बाइक की स्टीयरिंग थामते ही आंखों में भारीपन आने लगता है और अचानक नींद के झोंके आने लगते हैं? अक्सर लोग इस तरह की सिचुएशन से निपटने के लिए गाड़ी की खिड़की खोल देते हैं या म्यूजिक सिस्टम पर तेज गाने बजाने लगते हैं. अगर आप भी ऐसा ही करते हैं तो सावधान हो जाइए. साइंस और न्यूरोसाइंस के मुताबिक खिड़की खोलने या गाने बजाने जैसी तरकीबें आपकी थकान और नींद को दूर करने में बिल्कुल काम नहीं आतीं. ऐसे में ड्राइविंग के वक्त इन झपकियों और माइक्रोस्लीप की समस्या को इग्नोर करना जानलेवा साबित हो सकता है।

चाहे आप रोज ऑफिस के लिए कम्यूट कर रहे हों या वीकेंड पर किसी लंबी रोड ट्रिप पर निकल रहे हों, ड्राइविंग के दौरान थकान महसूस होना एक बेहद कॉमन लेकिन खतरनाक समस्या है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट में रिसर्च स्टडीज के हवाले से बताया गया है कि ड्राइविंग करते समय हमारा दिमाग किसी सामान्य काम के मुकाबले कहीं ज्यादा एक्टिव और कॉम्प्लेक्स प्रोसेस से गुजरता है.

क्या है ड्राइविंग की 60 मिनट थ्योरी?


अक्सर लोग सोचते हैं कि वे 3-4 घंटे लगातार बिना थके गाड़ी चला सकते हैं, लेकिन न्यूरोसाइंस इस बात को पूरी तरह खारिज करता है। रिसर्च के मुताबिक ड्राइविंग एक ऐसा काम है जिसमें लगातार बहुत ज्यादा और गहराई से ध्यान लगाने की जरूरत होती है. यह काम ईमेल का जवाब देने या किसी मशीन को ऑपरेट करने से भी कहीं ज्यादा मेंटल एफर्ट मांगता है. साइंटिफिक एविडेंस बताते हैं कि लगातार गाड़ी चलाने के महज 60 मिनट के भीतर ही इंसानी दिमाग में थकान हावी होने लगती है. 60 मिनट के बाद ड्राइवर का दिमाग पूरी तरह अलर्ट नहीं रहता। ऐसे में अनजाने में ड्राइविंग एरर्स होने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

ड्राइविंग के समय कैसे काम करता है दिमाग?

ड्राइविंग एक बेहद कॉम्प्लेक्स टास्क है। इसमें आपके दिमाग के कई हिस्से एक साथ तालमेल बिठाकर काम करते हैं। Cerebellum और Premotor Cortex, दिमाग के ये दो हिस्से आपके बॉडी मूवमेंट और गाड़ी के कंट्रोल्स को कोऑर्डिनेट करते हैं। दिमाग के Extrastriate Cortex का हिस्सा सड़क और आस-पास की विजुअल इंफॉर्मेशन को प्रोसेस करता है। इसके अलावा Thalamus आपको अलर्ट रखने और बाहरी इनपुट के हिसाब से फिजिकल रिस्पॉन्स देने में मदद करता है। जब आप थके होते हैं तो दिमाग के ये सभी हिस्से सही तरीके से काम करना बंद कर देते हैं। इससे रिस्पॉन्स टाइम धीमा हो जाता है.

खिड़की खोलना या गाना बजाना क्यों है फेल फॉर्मूला?

अक्सर लोग थकान महसूस होने पर गाड़ी का शीशा नीचे कर लेते हैं ताकि ठंडी हवा आए या फिर लाउड म्यूजिक चला लेते हैं. लेकिन साइंटिफिक रिसर्च में इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं कि ये तरीके ड्राइवर की थकान या नींद को असल में खत्म कर सकते हैं. ये केवल कुछ सेकंड के लिए आपको भ्रम में रख सकते हैं लेकिन आपके दिमाग की इंटरनल थकान को दूर नहीं कर पाते.

शराब पीकर ड्राइविंग करने जितनी ही खतरनाक है माइक्रोस्लीप

रिसर्च बताती है कि नींद या थकान की हालत में गाड़ी चलाना उतना ही डेंजरस है जितना शराब पीकर नशे में गाड़ी चलाना. ऑस्ट्रेलिया के आंकड़ों के मुताबिक सड़कों पर होने वाले करीब 20 से 30 फीसदी क्रैश और हादसों की वजह ड्राइवर को नींद आना ही होता है. आपको यह जानना चाहिए कि माइक्रोस्लीप थकान की सबसे डरावना नतीजा होती है। यह नींद का एक ऐसा अनैच्छिक झोंका होता है जो महज 1 से 15 सेकंड तक का हो सकता है. ऐसे देखने में लगता है कि ये कोई बड़ी बात नहीं पर इसे आंकड़ों में समझेंगे तो आपको भयावहता का अंदाजा होगा। अगर आप 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से गाड़ी चला रहे हैं और आपको सिर्फ 3 सेकंड की भी माइक्रोस्लीप आ गई तो आपकी गाड़ी बिना आपके कंट्रोल के 80 मीटर से ज्यादा दूर निकल जाएगी. यह किसी भी बड़े हादसे के लिए काफी है.

एक्सपीरियंस ड्राइवरों को भी है ज्यादा खतरा

एक बड़ा मिथक यह है कि जो लोग सालों से ड्राइविंग कर रहे हैं उन्हें नींद नहीं आती. लेकिन डेटा दिखाता है कि अनुभवी ड्राइवरों को भी थकान का उतना ही खतरा होता है. बल्कि कई बार वे ओवरकॉन्फिडेंट हो जाते हैं और थकान के बावजूद गाड़ी चलाते रहते हैं। ये आदत उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है.

सुरक्षित ड्राइविंग के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

1- 2 घंटे का ब्लॉक बनाएं

लंबी दूरी की यात्रा पर जा रहे हैं तो अपनी ड्राइविंग को अधिकतम दो-दो घंटे के ब्लॉक्स में बांटें और हर दो घंटे बाद छोटा ब्रेक जरूर लें.

2- कम से कम 5 घंटे की नींद

ड्राइव करने से पहले पिछली रात को न्यूनतम 5 घंटे (और आदर्श रूप से 7 से 9 घंटे) की अच्छी नींद लेना बेहद जरूरी है. 5 घंटे से कम की नींद दुर्घटना के चांस को दोगुना कर देती है.

3- 17 घंटे से ज्यादा न जागें

अगर आप लगातार 17 घंटे या उससे अधिक समय से जागे हुए हैं तो स्टीयरिंग व्हील को बिल्कुल हाथ न लगाएं.

4- बॉडी क्लॉक का ध्यान रखें

जिस समय आप आमतौर पर सोते हैं (जैसे देर रात या दोपहर) उस समय ड्राइविंग करने से बचें क्योंकि यह आपकी बॉडी क्लॉक को डिस्टर्ब करता है.

5- हाइड्रेटेड रहें

गाड़ी चलाते समय शरीर में पानी की कमी न होने दें. पर्याप्त पानी पीते रहें और अगर बहुत ज्यादा नींद आ रही हो, तो गाड़ी रोककर एक छोटी सी झपकी ले लें या किसी और के साथ ड्राइविंग शेयर करें.

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