इस अगस्त धरती पर अनोखी खगोलिय घटना होने वाली है। इस अगस्त में पृथ्वी सामान्य से थोड़ी तेज घूमेगी, जिसकी वजह से दिन कुछ मिलीसेकंड छोटे हो जाएंगे। टाइमएंडडेट.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार 5 अगस्त को पृथ्वी का सोलर डे नार्मल 24 घंटे से थोड़ा कम रहेगा। ये दिन न सिर्फ 2025 के सबसे छोटे दिनों में से एक होगा, बल्कि इसे सबसे छोटा दिन माना जाएगा। 5 अगस्त का दिन लगभग 1.25 मिलीसेकंड छोटा होगा। ये अंतर भले ही महसूस न हो पाए, लेकिन यह एक रहस्यमय बदलाव का हिस्सा है जिसने वैज्ञानिकों भी काफी हैरान है।
दिन धीरे-धीरे छोटे हो रहे हैं और इसकी वजह सिर्फ नॉर्दर्न हेमिस्फीयर में घटती गर्मी नहीं है। धरती की गति पिछले कुछ दशकों की सुस्ती के बाद अब तेज हो रही है और एक्सपर्ट के पास इसके पीछे का स्पष्ट कारण नहीं है।
2025 में तीन दिन ऐसे बताए गए हैं जब पृथ्वी का सोलर डे 24 घंटे से छोटा होगा, जिसमें 9 जुलाई को 1.23 मिलीसेकंड कम, 22 जुलाई को 1.36 मिलीसेकंड कम और 5 अगस्त को लेकर भी ऐसा ही अनुमान लगाया गया है। हालांकि, अब तक का सबसे छोटा दिन 5 जुलाई 2024 को दर्ज किया गया था, जब दिन 24 घंटे से 1.66 मिलीसेकंड छोटा रहा।
चंद्रमा की सटीक स्थिति साइंटिस्ट को यह समझने में मदद करती है कि 9 जुलाई, 22 जुलाई को सोलर डे क्यों छोटो हुआ था और 5 अगस्त को पृथ्वी का सोलर डे क्यों छोटा होगा। इन तिथियों पर चंद्रमा का पृथ्वी की इक्वेटर रेखा के सापेक्ष झुकाव ज्वारीय बलों को प्रभावित करता है, जिससे पृथ्वी की रोटेशन स्पीड में हल्का सा बदलाव आता है।
अर्थस्काई के मुताबिक, पृथ्वी को तारों के 360 डिग्री घूमने में 23 घंटे, 56 मिनट और 4.1 सेकंड लगते हैं। इसे नक्षत्र दिवस कहा जाता है। इसी वजह से तारे और ग्रह रोज लगभग चार मिनट पहले दिखाई देते हैं और मौसम के साथ रात का आसमान बदलता रहता है, क्योंकि पृथ्वी लगातार सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में घूमती रहती है। हम जिस 24 घंटे के दिन को जीते हैं, वह वास्तव में सोलर डे कहलाता है, जिसे तारों के बजाय सूर्य के आधार पर मापा जाता है। यानी एक दिन दोपहर से अगली दोपहर तक गिना जाता है, जो 24 घंटे या 86,400 सेकंड का होता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समय रहस्यमय तरीके से थोड़ा कम हो रहा है।
कैसी कम होती है पृथ्वी की स्पीड
1973 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से पृथ्वी का सौर दिवस धीरे-धीरे बढ़ता गया है, जिसका मुख्य कारण चंद्रमा है। जब चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, तो वह फ्रिक्शन जेनरेटेड करती है, जिससे उसका कक्षीय पथ थोड़ा बाहर की ओर खिसकता है। इस प्रक्रिया में पृथ्वी की रोटेशनल एनर्जी चंद्रमा में चली जाती है, जिससे पृथ्वी की गति धीमी हो जाती है और दिन लंबे हो जाते हैं। अगर चंद्रमा पृथ्वी की रोटेशनल स्पीड में थोड़ा असर डालता है, तो भी हाल के सालों में इसकी तेज़ी बढ़ने की असली वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है। 5 अगस्त को पृथ्वी की घूर्णन गति में आए बदलाव आम लोगों को महसूस नहीं होंगे, लेकिन अगर यही रुझान 2029 तक जारी रहा, तो पहली बार एक "निगेटिव लीप सेकंड" जोड़ा जा सकता है।