Bakrid 2026: बकरीद में कुर्बानी वाले बकरे की उम्र क्या होनी चाहिए, कोई भी बकरा नहीं उठा सकते, जानिए नियम

Bakrid 2026: ईद-उल-अजहा यानी बकरीद इस्लाम धर्म का पवित्र त्योहार है, जो हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इस साल यह 28 मई 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन लोग नमाज पढ़ते हैं, मिलते हैं और जरूरतमंदों की मदद कर समाज में भाईचारे का संदेश देते हैं। आइए जानते हैं कि कुर्बानी देने के नियम क्या हैं

अपडेटेड May 26, 2026 पर 12:31 PM
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Bakrid 2026: इस्लामिक मान्यताओं में हर जानवर के लिए एक तय उम्र निर्धारित की गई है।

ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है, इस्लाम धर्म का एक बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। ये दिन मुस्लिम समुदाय के लिए आस्था, त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। हर साल इस मौके पर हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल की कुर्बानी की याद में अल्लाह की इबादत की जाती है। इस साल भारत में बकरीद 28 मई 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन लोग सुबह विशेष नमाज अदा करते हैं और अपने परिवार व समाज के साथ मिलकर खुशियां साझा करते हैं।

साथ ही जरूरतमंदों की मदद करना भी इस त्योहार का अहम हिस्सा माना जाता है। बकरीद सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग और भाईचारे का संदेश देने वाला पर्व है, जो लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने और समाज में प्यार बढ़ाने की सीख देता है।

बकरीद की कहानी


इस त्योहार की शुरुआत उस ऐतिहासिक घटना से जुड़ी है जब अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की आस्था की परीक्षा ली। उन्हें अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने का आदेश मिला, और उनके लिए वह उनके बेटे हजरत इस्माइल थे। जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म को मानते हुए कुर्बानी का इरादा किया, तो अल्लाह उनकी नीयत से खुश हुए और उनके बेटे की जगह एक दुम्बा भेज दिया। तभी से बकरीद पर कुर्बानी की परंपरा शुरू हुई, जिसका असली संदेश त्याग, समर्पण और बुराइयों से दूरी है।

कौन से जानवरों की दी जा सकती है कुर्बानी?

इस्लामिक नियमों के अनुसार कुछ खास जानवर ही कुर्बानी के लिए जायज माने जाते हैं। इनमें बकरा, बकरी, भेड़, दुम्बा, भैंस, बैल और ऊंट शामिल हैं। सबसे जरूरी बात ये है कि ये जानवर पूरी तरह स्वस्थ और किसी भी गंभीर बीमारी या कमजोरी से मुक्त होने चाहिए।

किन जानवरों की कुर्बानी नहीं मानी जाती सही?

शरीयत के अनुसार कमजोर, बीमार या किसी तरह से विकलांग जानवर की कुर्बानी स्वीकार नहीं मानी जाती। जैसे अंधा, लंगड़ा, गंभीर रूप से घायल या बहुत कमजोर जानवर। इसके अलावा बहुत छोटे उम्र के जानवर भी इस प्रक्रिया के लिए उचित नहीं माने जाते। कई जगहों पर स्थानीय कानूनों का पालन भी जरूरी होता है, इसलिए नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है।

कुर्बानी के लिए उम्र का नियम क्या कहता है?

इस्लामिक मान्यताओं में हर जानवर के लिए एक तय उम्र निर्धारित की गई है। बकरा या बकरी कम से कम 1 साल की होनी चाहिए। भेड़ या दुम्बा कम से कम 6 महीने का होना जरूरी है। वहीं भैंस या बैल के लिए 2 साल और ऊंट के लिए कम से कम 5 साल की उम्र तय की गई है।

बकरीद सिर्फ जानवर की कुर्बानी का त्योहार नहीं है, बल्कि ये इंसान के अंदर मौजूद अहंकार, लालच और बुराइयों को खत्म करने का प्रतीक है। यह त्योहार हमें त्याग, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देता है।

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