अगर कोई कहे कि सांप उड़ सकते हैं, तो पहली प्रतिक्रिया शायद यही होगी कि यह कोई मजाक है। सांप को हम जमीन पर रेंगने वाले जीव के रूप में जानते हैं, लेकिन प्रकृति ने इसकी एक ऐसी प्रजाति भी बनाई है, जो पेड़ों के बीच हवा में कई मीटर तक ग्लाइड कर सकती है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में पाया जाने वाला क्राइसोपेलीया जीनस इसी अनोखी क्षमता के लिए जाना जाता है।
यह सांप उड़ता है या हवा में तैरता है?
क्राइसोपेलीया को आमतौर पर उड़ने वाला सांप या ग्लाइडिंग स्नेक कहा जाता है। हालांकि, यह पक्षियों की तरह पंख फड़फड़ाकर उड़ान नहीं भरता। यह ऊंचे पेड़ से छलांग लगाता है और अपने शरीर की बनावट बदलकर हवा में फिसलते हुए दूसरे पेड़ तक पहुंचता है। इस जीनस में पैराडाइज ट्री स्नेक, ऑर्नेट फ्लाइंग स्नेक और बैंडेड फ्लाइंग स्नेक जैसी प्रजातियां शामिल हैं। ये सांप मुख्य रूप से पेड़ों पर रहते हैं और हल्के विषैले माने जाते हैं।
पेड़ों के बीच हवा का रास्ता क्यों चुना?
इन सांपों का जीवन जंगल की ऊपरी शाखाओं यानी पेड़ों की छतरी वाले हिस्से में गुजरता है। लेकिन हर पेड़ की शाखाएं आपस में जुड़ी हों, यह जरूरी नहीं। ऐसे में हर बार जमीन पर उतरकर दूसरे पेड़ तक पहुंचना उनके लिए ऊर्जा खर्च करने वाला और खतरनाक हो सकता है। जमीन पर कई शिकारी मौजूद होते हैं। इसलिए विकास की प्रक्रिया ने इन्हें एक ऐसा तरीका दिया, जिससे वे नीचे उतरे बिना एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंच सकें।
पहले बनाता है J आकार, फिर लगाता है छलांग
इस सांप की ‘हवाई यात्रा’ भी काफी दिलचस्प होती है। शाखा के किनारे पहुंचकर यह अपने शरीर को अंग्रेजी के J अक्षर जैसी आकृति में मोड़ता है। इसके बाद अचानक खुद को आगे की ओर धक्का देकर हवा में छलांग लगा देता है। इसके बाद शुरू होता है इसका सबसे अनोखा करतब।
हवा में शरीर ही बन जाता है पंख
हवा में पहुंचते ही सांप अपनी पसलियों को फैलाकर शरीर को चपटा कर लेता है। उसका सामान्य गोलाकार शरीर फैलकर चौड़ा हो जाता है। इस बदली हुई आकृति के कारण हवा उसके शरीर के आसपास अलग तरीके से बहती है और उसे हवा में टिके रहने तथा आगे बढ़ने में मदद मिलती है। यानी इसके पास पक्षियों जैसे पंख नहीं होते, लेकिन उड़ान के लिए इसका पूरा शरीर ही एक खास ‘पंख’ का काम करने लगता है।
सिर्फ गिरता नहीं, हवा में दिशा भी संभालता है
सबसे हैरानी की बात यह है कि सांप हवा में सिर्फ नीचे नहीं गिरता। वह अपने शरीर को लगातार लहरदार तरीके से हिलाता रहता है। इससे उसे संतुलन बनाए रखने और अपनी दिशा नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसी वजह से वह हल्की ढलान के साथ कई मीटर की दूरी तय करके दूसरे पेड़ या सुरक्षित जगह तक पहुंच सकता है।
वैज्ञानिकों के लिए भी बना शोध का विषय
क्राइसोपेलीया की यह क्षमता जीवविज्ञानियों और वैज्ञानिकों के लिए बेहद दिलचस्प है। इनके शरीर की बनावट और हवा में गति को समझने से वायुगतिकी, रोबोटिक्स और लचीले रोबोट के डिजाइन जैसे क्षेत्रों में नई जानकारी मिल सकती है।
उड़ने वाला सांप यह साबित करता है कि हवा में सफर करने के लिए हमेशा पंखों की जरूरत नहीं होती। प्रकृति ने इस जीव को उसके शरीर की संरचना के जरिए ही ऐसा समाधान दे दिया। पेड़ों की शाखाओं के बीच चुपचाप ग्लाइड करता यह सांप याद दिलाता है कि विकास की प्रक्रिया कितने अनोखे रास्ते खोज सकती है। जो चीज पहली नजर में असंभव लगती है, प्रकृति उसे भी हकीकत में बदल सकती है।