जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि जिस चीज की हमें सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसे हासिल करना उतना ही मुश्किल लगता है। नौकरी चाहिए तो कंपनियां जवाब नहीं देतीं और पढ़ाई के लिए लोन मांगो तो बैंक पीछे हट जाते हैं। लेकिन वक्त बदलते ही तस्वीर भी बदल जाती है। गोवा के एक फाउंडर अक्षत श्रीवास्तव ने लिंक्डइन पर अपना ऐसा ही अनुभव साझा किया है। उनका कहना है कि अब जब उन्हें नौकरी या लोन की जरूरत नहीं है, तो दोनों के ऑफर लगातार मिल रहे हैं। उनकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
जब 100 कंपनियों से किया संपर्क
अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि आज उन्हें लिंक्डइन पर रोजाना करीब दो जॉब ऑफर मिलते हैं, जबकि वह नौकरी की तलाश में भी नहीं हैं। लेकिन जब वह खुद नौकरी पाने के लिए कोशिश कर रहे थे, तब हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय उन्होंने करीब 100 कंपनियों से संपर्क किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ दो कंपनियों की तरफ से जवाब आया। यह अनुभव बताता है कि नौकरी की तलाश में मेहनत करने के बावजूद मनचाहा मौका मिलना हमेशा आसान नहीं होता।
विदेश में पढ़ाई के लिए लोन लेना भी था मुश्किल
अक्षत ने अपनी पोस्ट में एजुकेशन लोन का किस्सा भी साझा किया। विदेश में एमबीए करने के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने कई बैंकों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने वाला लोन मिलना मुश्किल होगा। वहीं, अब जब उन्हें कर्ज की जरूरत नहीं है, तो उनके मुताबिक, उन्हें रोजाना करीब पांच लोन ऑफर मिल रहे हैं। इसी विरोधाभास ने उनके अनुभव को चर्चा का विषय बना दिया है।
जरूरत के वक्त ही क्यों नहीं मिलते मौके?
अक्षत की पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी नौकरी में खुश होता है, तब रिक्रूटर्स उसे नौकरी के ऑफर देते हैं। लेकिन जैसे ही वह नौकरी तलाशना शुरू करता है, कंपनियों की तरफ से जवाब मिलना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोगों ने इस स्थिति को जिंदगी का अजीब संयोग बताया, जबकि अन्य ने इसके पीछे व्यावहारिक वजहें तलाशने की कोशिश की।
'काबिलियत बढ़ाओ, कामयाबी खुद पीछे आएगी'
एक यूजर ने इस अनुभव को किस्मत से जोड़ने के बजाय व्यक्ति की योग्यता और विश्वसनीयता से जोड़ा। उसके मुताबिक, कंपनियां उम्मीदवार की क्षमता, अनुभव और उपलब्धियों को देखकर फैसला करती हैं। इसी तरह बैंक भी कर्ज देने से पहले व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और उसे चुकाने की क्षमता का आकलन करते हैं।
अपनी बात समझाने के लिए यूजर ने फिल्म 3 इडियट्स का मशहूर डायलॉग भी याद दिलाया, “काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी।”
अक्षत का अनुभव हर किसी की जिंदगी पर लागू हो, यह जरूरी नहीं। लेकिन उनकी पोस्ट ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा किया है: क्या सफलता के लिए सिर्फ मौके तलाशना काफी है, या खुद को बेहतर बनाना भी उतना ही जरूरी है?