घर में उड़ते मच्छरों और उनसे होने वाली खतरनाक बीमारियों से हर कोई परेशान रहता है। इनसे छुटकारा पाने के लिए लोग तरह-तरह के केमिकल रिपेलेंट्स, कॉइल्स और लिक्विड का इस्तेमाल करते हैं। ये सभी सेहत के लिए नुकसानदेह भी होते हैं। पर अब टेक्नोलॉजी की दुनिया से आपकी इस शास्वत समस्या के इलाज के लिए एक बेहद अनोखी और क्रांतिकारी जानकारी सामने आई है। फ्रांस के एक स्टार्टअप ने एक ऐसा छोटा और अनोखा ऑटोनॉमस माइक्रोड्रोन तैयार किया है जो हवा में उड़ते हुए मच्छरों को ढूंढकर उनका शिकार कर लेता है। हवा में उड़ते कीड़ों को ट्रैक कर उसे मार गिराने वाले इस अनोखे और हथेली के आकार के ड्रोन का वीडियो सामने आने के बाद यह दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है।
सिर्फ 40 ग्राम का प्रोटोटाइप और कमाल की तकनीक
इस कमाल की तकनीक को फ्रांस के स्टार्टअप टॉर्नयॉल ने तैयार है। यह एक माइक्रोड्रोन प्रोटोटाइप है। इसका वजन महज 40 ग्राम है और यह इंसान की हथेली के आकार का है। इस ड्रोन को बनाने का मुख्य उद्देश्य मलेरिया, डेंगू और जिका जैसी जानलेवा बीमारियों को फैलाने वाले मच्छरों की आबादी को बिना किसी केमिकल के खत्म करना है। कंपनी का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी अभी सिर्फ टेस्टिंग स्टेज में है और व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारने के लिए अभी पूरी तरह तैयार नहीं है।
आमतौर पर ड्रोन किसी भी चीज को देखने के लिए कैमरों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन टॉर्नयॉल का यह ड्रोन काफी अलग और एडवांस है। यह ड्रोन मुख्य रूप से कैमरों पर निर्भर नहीं है। इसके बजाय यह कारों में मिलने वाले पार्किंग सेंसर की तरह अल्ट्रासोनिक सोनार तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह ड्रोन उड़ते समय लगातार अल्ट्रासोनिक तरंगें छोड़ता है और फिर लौटकर आने वाली गूंज को अपने छोटे-छोटे माइक्रोफोन्स के जरिए रिसीव कर उसका विश्लेषण करता है।
पंखों की फड़फड़ाहट से पहचान
मच्छरों और दूसरे कीड़ों के उड़ने के दौरान उनके पंखों की फड़फड़ाहट से एक अनोखा डॉपलर पैटर्न बनता है। यह ड्रोन का सिस्टम उस पैटर्न को मापता है और यह सुनिश्चित करता है कि सामने उड़ने वाला कीड़ा मच्छर ही है। इसके बाद यह हवा में सीधे टारगेट से टकराता है और उसे मार गिराता है।
लैब टेस्ट में मिली पहली बड़ी सफलता
हाल ही में कंपनी द्वारा किए गए एक लाइव प्रदर्शन में इस ड्रोन ने एक कंट्रोल्ड इनडोर वातावरण के भीतर उड़ते हुए एक पतंगे खुद से खोजा, उसे ट्रैक किया और हवा में ही मार गिराया। स्टार्टअप 'टॉर्नयॉल' के मुताबिक किसी माइक्रोड्रोन द्वारा हवा में उड़ते हुए कीड़े को बिना इंसानी हस्तक्षेप के मार गिराने का यह दुनिया का पहला सफल प्रदर्शन है।
हालांकि ने स्वीकार किया है कि इस सफल प्रदर्शन के दौरान बाहरी मोशन ट्रैकिंग और ऑफबोर्ड कंप्यूटिंग का उपयोग किया गया था। ड्रोन के भीतर ही पूरी प्रोसेसिंग की क्षमता विकसित करने पर अभी काम चल रहा है।
नर और मादा मच्छर में भी कर सकेगा फर्क!
टॉर्नयॉल स्टार्टअप इस तकनीक को और भी एडवांस बनाने पर काम कर रहा है। कंपनी का मानना है कि भविष्य के वर्शन्स इतने एडवांस होंगे जो पंखों की फड़फड़ाहट की आवाज से न सिर्फ मच्छरों की विभिन्न प्रजातियों की पहचान कर सकेंगे, बल्कि नर और मादा मच्छर के बीच भी अंतर कर पाएंगे। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में ऐसे छोटे-छोटे ऑटोनॉमस ड्रोन के बेड़े तैयार करना है, जो अपने चार्जिंग स्टेशनों से खुद उड़ान भरकर घरों, बगीचों और पूरे पड़ोस में लगातार गश्त करेंगे और मच्छरों का सफाया करेंगे।
कंपनी का दावा है कि इस सिस्टम से मच्छरों के नियंत्रण पर आने वाला खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा। हालांकि इस दावे को अभी तक किसी इंडिपेंडेंट एजेंसी ने वेरिफाई नहीं किया है।
ये चुनौतियां अभी भी बनी हैं रुकावट
वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से केमिकल कीटनाशकों के विकल्प तलाश रहे हैं क्योंकि मच्छरों में इन रसायनों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक अकेले साल 2024 में दुनिया भर में मलेरिया के कारण लगभग 610000 लोगों की मौत हुई थी। इस खतरनाक आंकड़े के बीच यह तकनीक उम्मीद की किरण तो है लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं। यह ड्रोन अभी तक सिर्फ बंद और नियंत्रित इनडोर वातावरण में ही टेस्ट किया गया है। इसे बाहरी वातावरण में सुरक्षित रूप से उड़ाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि बाहर चलने वाली हवा, बारिश और दूसरी मौसमी वजहें ड्रोन की उड़ान और कीड़ों को डिटेक्ट करने की क्षमता को काफी प्रभावित करते हैं। पूरी प्रोसेसिंग को ड्रोन के छोटे से शरीर के भीतर ही समाहित करना अभी बाकी है।